पुलिस व एनजीओ की मदद से 14 साल महिला को मिला घर

- जिन बच्चों को छोटा छोड़ आया था व भी अब मां

By: Vanita Jharkhandi

Published: 22 Nov 2020, 07:25 PM IST

बन चुकी है कोलकाता
नियति व्यक्ति को कहां से कहा ले जाती है। 14 साल पहले अपने घर से बाहर निकली थी फिर वापस नहीं लौटी। मानसिक रूप से बीमार गीता फूलबागान थाने तथा एनजीओ की मदद से अपने घर लौट सकी है। उसे नहीं मालूम कि उसके छोटे बच्चे बड़े हो चुके है और वह नानी बन चुकी है। फिलहाल वह दीदी के घर पर न्यूटाउन मेों है नवम्बर के अन्त में उसे अपने माता-पिता के पास पहुंचा दिया जाएगा। वह 2006 में लापता गीता सरकार 2020 में अपने घर लौट रही है। 14 साल बाद, गीता सरकार अपनी माँ और पिता को एक वीडियो कॉल पर देखकर अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकी। उसने अपनी बहन और बहनोई को भी पहचान लिया। गीता के बेटे और बेटियां भी बड़े हो चुके हैं। उनकी बेटी भी बच्चे की मां बनी। लेकिन समय के साथ-साथ महिला कहां या किस हालत में थी, कुछ भी याद नहीं।
उसे पिछले साल मार्च में फूलबागान पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों ने बचाया था। फिर उन्होंने इसे एनजीओ को सौंप दिया। गीता के परिवार की तलाश शुरू हुई । एनजीओ की एक अधिकारी भारती आईच और पूर्व कोलकाता के फूलबागान और मालदह के बामनगोला पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आखिरकार गीता के घर का पता लगा लिया। भुगतान कर दिया। 14 साल बाद खो गई गीता सरकार को उनके परिवार को सौंप दिया गया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गीता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है इसलिए उसका इलाज भी मानसिक अस्पताल करवाया गया। भारत के अनुसार, गीता कभी बेंगलुरु, कभी सिलीगुड़ी, कभी मुर्शिदाबाद और कभी बांग्लादेश के कुछ गांवों का भी उल्लेख करती रही जिससे उसका पता लगाना मुश्किल था। अंत में उन्होंने जिन स्थानों का उल्लेख किया, उनका नाम खोज निकाला गया। स्कूलों, खेतों, मंदिरों और कुछ उल्लेखनीय वस्तुओं की तस्वीरें दिखा। कुछ स्थानों को भी वह पहचान सकी। अचानक एक दिन मालदह के बामनगोला थाने के छतिया इलाके में एक स्कूल देखते ही उसने कहा कि वह वहाँ पढ़ती थी। गीता ने क्षेत्र के कुछ और चित्रों को देखकर उस स्थान की पहचान की। फूलबागान पुलिस स्टेशन को उसी के अनुसार सूचित किया गया। फूलबागान पुलिस स्टेशन ने मालदह के बामनगोला पुलिस स्टेशन को महिला की तस्वीर और विवरण दिया। बामनगोला पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र की पंचायत और निवासियों के माध्यम से महिला की पहचान की पुष्टि की। पुलिस स्टेशन के एक स्वयंसेवक को छठिया निवासी बलहारी मधुर के घर भेजा गया। पता चला कि उनकी बेटी लंबे समय से गायब है। गीता की बहन और बहनोई न्यूटाउन में रहते हैं। उन्हें भी मामले की जानकारी दी गई। गीता को मोबाइल स्क्रीन के सामने रखकर एक वीडियो कॉल किया गया। दूसरी तरफ उसके माता-पिता थे। उसने सभी सको पहचान लिया। न्यूटाउन में गीता की बहन कल्पना बाला और बहनोई गणेश बाला के यहां है। उन लोगों ने बताया कि गीता 21 जून 2006 को लापताथी। विवाह के बाद से उसे अमानवीय यातना का शिकार होना पड़ा। पति के दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप, वह अपनी पांच वर्षीय बेटी और तीन साल के बेटे के साथ अपने पिता के घर आ गई। लेकिन उसने अपने पिता गरीबी थी। इसलिए एक किसान के घर में काम करते हुए, गीता ने रोजाना खाना और 30 रुपे में काम शुरू किया। वह किसान के पास पैसे लाने निकली थी फिर घर नहीं लौटी।
गीता को याद नहीं है कि वह खुद कहीं गई थी या उसकी तस्करी हुई थी। उसके पति ने दूसरी शादी कर ली। गीता को 28 नवंबर को मालदा में उसके माता-पिता के पास ले जाया जाएगा।

Vanita Jharkhandi Reporting
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