script26 crore people in India suffer from the problem of sleeplessness | भारत में 26 करोड़ लोग नींद नहीं आने की समस्या से ग्रसित | Patrika News

भारत में 26 करोड़ लोग नींद नहीं आने की समस्या से ग्रसित

कोरोना काल में हम नींद की समस्या (स्लीप डिसऑर्डर) महामारी के दौर में भी प्रवेश कर गए। नौकरी खोने, भविष्य की चिंता, व्यापार में मंदी ने हमारी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इन्ही चिताओं में डूबे लोगों की रात की नींद उड़ गई है तो कई लोगों की रात में नींद खुल जाती है।

कोलकाता

Published: March 21, 2022 12:37:48 am

बीमारी: 30 फीसदी आबादी समस्या की जद में
दुनिया की 45 फीसदी आबादी पर खतरा
रवीन्द्र राय
कोलकाता. कोरोना काल में हम नींद की समस्या (स्लीप डिसऑर्डर) महामारी के दौर में भी प्रवेश कर गए। नौकरी खोने, भविष्य की चिंता, व्यापार में मंदी ने हमारी जिंदगी पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इन्ही चिताओं में डूबे लोगों की रात की नींद उड़ गई है तो कई लोगों की रात में नींद खुल जाती है। नींद की समस्या दुनिया की 45 फीसदी आबादी के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता के लिए खतरा बन गई है।
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देश में 20 फीसदी से ज्यादा पीडि़त
एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया की 30 फीसदी आबादी नींद की समस्या से पीडि़त हैं। जबकि दुनियाभर में 25 फीसदी बुजुर्गों को यह समस्या है। नेशनल सेंटर ऑफ बॉयो टेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (एनसीबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 20 फीसदी (करीब 26 करोड़) से ज्यादा लोग नींद की समस्या के शिकार हैं।
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बच्चे से लेकर युवा भी चपेट में
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दो साल में नींद की समस्या के रोगियों की संख्या दोगुनी हुई है। इसमें 10 वर्ष के बच्चे से लेकर 35 वर्ष तक के युवा सबसे ज्यादा हैं। बच्चे पढ़ाई के तनाव और ब्लू स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण चपेट में आ रहे हैं। युवा नौकरी या बिजनेस के तनाव के चलते और उम्रदराज लोग स्वाभाविक रूप से ग्रस्त हैं।
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हर रोज 5 में से 1 दुर्घटना
पूरी नींद नहीं ले पाने के कारण सड़क हादसे भी बढ़ रहे हैं। हर रोज पांच में से एक कार दुर्घटना नींद पूरी न होने के कारण होती है। पूरे दिन सुस्ती और आलस महसूस होता रहता है। कामकाज पर भी असर पड़ता है।
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ढाई साल में बीमारियां बढ़ी
डॉ. सौरव दास ने बताया कि दो ढाई साल में नींद से जुड़ी तीन बीमारियों अनिद्रा (इंसोम्निया), ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया और डिलेड फेज सर्कैडियन रिदम डिसऑर्डर से पीडि़त ज्यादा मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इंसोम्निया से पीडि़त इंसान को नींद आनी बंद हो जाती है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीडि़त को रात को सोते समय सांस लेने में कुछ देर के लिए रूकावट आ जाती है। डिलेड फेज सर्कैडियन रिदम डिसऑर्डर बीमारी भी पैर पसार रही है।
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इनका कहना है
अवसाद, तनाव, भय से पीडि़त लोगों में अनिद्रा की समस्या बढ़ जाती है। लंबे समय तक नींद पूरी नहीं होने पर याददाश्त और एकाग्रता में कमी आती है। रात को हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। चाय, कॉफी, बोतलबंद पेय पदार्थ और नशे से बचना चाहिए।
डॉ. राहुल जैन, कोलकाता
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