आत्मनिर्भर भारत अभियान टैगोर के दृष्टिकोण का सार: पीएम

- देश के चिंतन की धारा टैगोर के राष्ट्रवाद के चिंतन में थी मुखर

By: Rajendra Vyas

Updated: 26 Dec 2020, 12:00 AM IST

कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को गुरुवार को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के दृष्टिकोण का सार बताया और कहा कि यह विश्व तथा भारत के कल्याण और उसे सशक्त करने के साथ विश्व में समृद्धि लाने का भी मार्ग है। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी विश्वविद्यालय से निकले संदेश आज पूरे विश्व तक पहुंच रहे हैं और भारत आज अंतरराष्ट्रीय सौर अलायंस के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पेरिस समझौते के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है। वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा टैगोर के राष्ट्रवाद के चिंतन में मुखर थी। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी इस समारोह के दौरान उपस्थित थे।
देश की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान
मोदी ने कहा कि टैगोर का दृष्टिकोण था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे। आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए, विश्व-भारती। मां भारती और विश्व के साथ समन्वय। मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान देश की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है। गुरुदेव ने स्वदेशी समाज का संकल्प दिया था और वह गांवों तथा कृषि को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। विश्व बंधुत्व को बढ़ावा देने में विश्व भारती विश्वविद्यालय की सराहना की और साथ ही छात्रों से वोकल फॉर लोकल अभियान से जुडऩे का आह्वान किया।
भक्ति आंदोलन ने किया एकता को मजबूत
उन्होंने कला, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान और नवाचार में इस विश्वविद्यालय की उपलब्धयों की भी जमकर सराहना की। भारत की आजादी के आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का काम किया था। उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन के साथ-साथ देश में कर्म आंदोलन भी चला। भारत के लोग गुलामी और साम्राज्यवाद से लड़ रहे थे। चाहे वो छत्रपति शिवाजी हों, महाराणा प्रताप हों, रानी लक्ष्मीबाई हों, कित्तूर की रानी चेनम्मा हों, भगवान बिरसा मुंडा का सशस्त्र संग्राम हो।
ऊर्जा देने वाला आराध्य स्थल बताया
मोदी ने विश्वविद्यालय को भारत के लिए देखे गए टैगोर के सपने को मूर्त रूप देने और देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला आराध्य स्थल बताया। टैगोर द्वारा विश्व भारती, देश का सबसे पुराना केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है। नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर पश्चिम बंगाल की प्रमुख हस्तियों में गिने जाते हैं।
वर्ष 1951 में विश्व भारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था और उसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में शुमार किया गया था। प्रधानमंत्री इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं।
सुनाया गुरुदेव का मंत्र, एकला चलो रे
पीएम ने कहा कि गुरुदेव का सबसे प्रेरणादायी मंत्र तो याद ही है। जोदि तोर डाक शुने केऊ ना ऐसे तबे एकला चलो रे यानी कोई साथ न आए, अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अगर अकेले चलना पड़े तो चलिए। उन्होंने विश्वभारती के छात्र-छात्राओं को एक टास्क भी दिया और कहा कि इस बार कोरोना महामारी के चलते पौष मेला नहीं हो पाया। स्टूडेंट्स पौष मेले में आने वाले लोगों से संपर्क करें और कोशिश करें कि उनकी कलाकृतियां ऑनलाइन कैसे बेची जा सकें।
हमें नए लक्ष्य गढऩे होंगे
मोदी ने कहा कि वर्ष 2022 में देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे। विश्वभारती की स्थापना के 27 साल बाद देश आजाद हो गया था। 27 साल बाद भारत की आजादी को 100 साल हो जाएंगे। हमें नए लक्ष्य गढऩे होंगे, नई उर्जा जुटानी होगी। इस लक्ष्य में हमारा मार्गदर्शन गुरुदेव की ही बातें करेंगी। उनके विचार करेंगे। मोदी ने कहा कि भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बंगाल की पीढिय़ों ने खुद को खपा दिया था। खुदीराम बोस सिर्फ 18 वर्ष की आयु में फांसी चढ़ गए। प्रफुल्ल चाकी 19 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। बीना दास, जिन्होंने बंगाल की अग्नि कन्या के रूप में जाना जाता है। सिर्फ 21 साल की उम्र में जेल भेज दी गई थीं।

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