केरल के बाद अब ‘निपाह’ ने दी बंगाल में दस्तक!

बेंगलुरू में कार्यरत मुर्शीदाबाद निवासी श्रमिक बेलियाघाटा अस्पताल के आईसोलोशन वार्ड में भर्ती, ‘निपाह’ संक्रमण की आशंका बेंगलुरू में 20 दिनों से था

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 24 May 2018, 09:53 PM IST

कोलकाता. केरल को अपनी चपेट में लेने के साथ 10 लोगों की मौत का कारण बन चुके लाइलाज और जानलेवा ‘निपाह’ वायरस ने अब बंगाल में भी दस्तक दे दी है। बेंगलुरू में कार्यरत बंगाल के श्रमिक सैफिकुल शेख को ‘निपाह’ संक्रमण की आशंका के कारण बेलियाघाटा स्थित आईडी अस्पताल के आईसोलोशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से संपूर्ण बंगाल में हाई अलर्ट कर दिया गया है। मुर्शीदाबाद जिला स्थित रेजीननगर निवासी सैफिकुल बेंगलुरू में गत 20 दिनों से तेज बुखार से ग्रसित था। वहां इलाज के बाद भी ठीक न होने पर पिछले दिनों वह जब घर लौटा, तो परिजन उसे लेकर मुर्शीदाबाद के बेलडांगा अस्पताल गए, जहां उसकी हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने बेलियाघाटा स्थित आईडी अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल उसे बेलियाघाटा आईडी अस्पताल के आईसोलोशन वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जबतक उसकी खून जांच की रिपोर्ट नहीं आती तबतक कुछ भी कहना मुश्किल है। हालांकि डॉक्टरों ने सैफिकुल के लक्षणों को देखते हुए उसे ‘निपाह’ वायरस से संक्रमित होने की आशंका भी जताई। उधर राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुरुवार को बंगाल के सभी सरकारी अस्पतालों को ‘निपाह’ से संक्रमित किसी भी मरीज के इलाज के लिए आने की सूचना विभाग को तत्काल देने के निर्देश जारी किए गए। उल्लेखनीय है कि देश में सबसे पहले सिलीगुड़ी में ही ‘निपाह’ वायरस का प्रकोप २००१ में फैला था। उस समय सिलीगुड़ी में 66 लोग ‘निपाह’ से संक्रमित हुए थे, जिसमें 45 की जान गई थी। अनेक लोग शहर छोडक़र बाहर चले गए थे।
क्या है निपाह वायरस?
‘निपाह’ पशुओं से पशुओं, इंसानों और इंसानों से इंसानों में फैलने वाला लाइलाज, संक्रामक और घातक वायरस है। यह एक तरह का दिमागी बुखार है, जिसके लिए चमगादड़ जिम्मेदार है। निपाह वायरस संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ मनुष्य में आसानी से फैल जाता है। यह वायरस चमगादड़ों से फैलता है और इसका कोई वैक्सीन फिलहाल मौजूद नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनाई है, जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक निपाह एक ऐसा वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। इस वायरस का मुख्य स्रोत फ्रूट बैट यानी वैसे चमगादड़, जो फल खाते हैं।

-कहां से आया निपाह वायरस?
इस वायरस की सबसे पहले पहचान 1998 में मलेशिया के काम्पुंग सुंगाई के निपाह इलाके में हुई थी। उस समय वहां दिमागी बुखार का संक्रमण था और यह बीमारी चमगादड़ों से इंसानों और जानवरों तक फैल गई। इस बीमारी की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग ***** पालन केंद्र में काम करते थे। यह वायरस ऐसे फलों से इंसानों तक पहुंचा, जो चमगादड़ों के संपर्क में आए थे। इसके बाद 2001 में बांग्लादेश में इस वायरस के मामले सामने आए। उस समय वहां के कुछ लोगों ने चमगादड़ों के संपर्क वाले खजूर खा लिए थे और फिर यह वायरस फैल गया।

क्या हैं लक्षण?
निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह है। बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्कत, भयानक सिरदर्द और बुखार से होती है, जिसके बाद दिमागी बुखार की चपेट में व्यक्ति आता है। बुखार, सिरदर्द, चक्कर, दिमाग में जलन, सांस लेने में तकलीफ, धुंधला दिखना, ब्रेन में सूजन, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। कुछ मामलों में रोगी को सांस संबंधित समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। इसका संक्रमण किसी भी मनुष्य को 48 घंटे के भीतर कोमा में ले जा सकता है और 21 से 22 दिनों में जान तक जा सकती है।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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