तृणमूल के लिए खतरे की घंटी, ओवैसी की पार्टी ने बंगाल की 60 सीटों पर तैयार कर लिए बूथवार संगठन

पश्चिम बंगाल (West Bengal )के 30 फीसदी अल्पसंख्यक मतों के सहारे सत्ता के सिंहासन पाने के फार्मूले में अब पेंच फंस गया है। इस वोट बैंक पर दावेदारों की संख्या बढ़ रही है। सियासत के इस खेल में नए खिलाड़ी के रूप में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी दस्तक दे रही है। जिससे तृणमूल कांग्रेस ( Trinmool Congress) की चिंता बढ़ रही है।

By: Paritosh Dube

Published: 08 Dec 2019, 09:52 PM IST

कोलकाता.
राज्य की 30 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी को सामने रखकर चुनावी मैदान में उतरने का संकेत दे रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की अभी बंगाल में प्रदेश इकाई का गठन नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं का दावा है कि राज्य की 50 से 60 सीटों पर उनका बूथवार संगठन तैयार हो चुका है। पार्टी समर्थकों की संख्या ढाई से तीन लाख पहुंच गई है। 15 हजार के लगभग कार्यकर्ता तैयार हो गए हैं। राज्य के पुरुलिया, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, झाडग़्राम और बांकुड़ा को छोडक़र सभी जिलों में पार्टी का संगठन ब्लॉक स्तर तक पहुंच गया है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जनवरी 2020 में पार्टी की प्रदेश इकाई का भी गठन कर लिया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2013 से ही राज्य में सक्रिय है। पिछले कुछ महीनों में उसकी गतिविधियों में तेजी आई है। कुछ जिलों को छोडक़र अधिकांश में ब्लॉक स्तर पर संगठन खड़ा कर लिया गया है। जनवरी 2020 में कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में असदुद्दीन ओवैसी की सभा कराए जाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। संबंधित एजेंसियों से अनुमति मांगी गई है।

लगा रहे राज्य प्रशासन पर प्रताडऩा का आरोप
पार्टी नेताओं के मुताबिक राज्य में उसके प्रभाव की भनक पाकर तृणमूल कांग्रेस सकते में है। पुलिस अधिकारी पार्टी नेताओं के साथ दुव्र्यवहार कर रहे हैं। उन्हें राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहने की धमकी दी जा रही है। मालदह में पार्टी से जुड़े मतीउर रहमान को हाल ही में गिरफ्तार किया गया है, उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। पुलिस के मुताबिक, रहमान पर साइबर अपराध और मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए उत्तर बंगाल के कु छ जिला पुलिस कप्तानों को संगठन की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा था।

वायदा नहीं हुआ पूरा
पार्टी से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने अल्पसंख्यकों से किया गया वादा पूरा नहीं किया। उन्हें १० फीसदी आरक्षण देने, १० हजार मदरसों को सरकारी बनाने का वायदा किया गया था। हाल यह है कि अब तक ३०० मदरसों को ही सरकारी मदरसा बनाया गया है। मदरसों के विकास में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस और वाममोर्चा की तरह की तृणमूल कांग्रेस भी अल्पसंख्यक नेतृत्व पनपते नहीं देख पा रही है। इसलिए कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त किया जा रहा है। पार्टी के ही एक अन्य नेता के मुताबिक राज्य सरकार अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव बरत रही है। उनका दावा है कि वर्ष 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने के बाद, आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 90 लोगों को रिहा कर दिया गया, जिनमें कोई भी मुस्लिम नहीं है। पार्टी नेता कहते हैँ कि राज्य सरकार इमामों को वक्फ फंड से मासिक भत्ते दे रही है। जो सरकारी धन नहीं है।

इधर बन गए कई गुट
बताया जाता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं का दायरा बढऩे के बाद कई गुट तैयार हो गए हैं। हालांकि अब तक प्रदेश इकाई तैयार नहीं हुई है। जनवरी 2020 में प्रदेश इकाई के गठन की संभावना है।

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