राजनेता बनने से पहले क्या थे भारत रत्न प्रणव मुखर्जी, जानेंगे तो चौंक जाएंगे...

राजनेता बनने से पहले क्या थे भारत रत्न प्रणव मुखर्जी, जानेंगे तो चौंक जाएंगे...

Prabhat Kumar Gupta | Updated: 08 Aug 2019, 09:45:18 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

Rashtrapati Bhawan में गुरुवार को राष्ट्रपति Ramnath Kovind के हाथों देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ पाने वाले Former President Pranab Mukherjee पश्चिम बंगाल के रहने वाले दूसरे व्यक्ति हैं।

 

- सर्वोच्च पुरस्कार पाने वाले पश्चिम बंगाल के दूसरे व्यक्ति
प्रभात गुप्ता.

कोलकाता.
Rashtrapati Bhawan में गुरुवार को राष्ट्रपति Ramnath Kovind के हाथों देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ पाने वाले Former President Pranab Mukherjee पश्चिम बंगाल के रहने वाले दूसरे व्यक्ति हैं। इससे पहले 1958 में बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री Dr. Bidhan Chandra Roy को भारत रत्न से नवाजा गया था। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद मुखर्जी ने कलकत्ता में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल (पोस्ट एंड टेलीग्राफ) के कार्यालय में उच्च स्तरीय क्लर्क के रूप में काम किया। इसके बाद 1963 में उन्होंने कलकत्ता के विद्यासागर कॉलेज में राजनीतिक शास्त्र के लेक्चरर (असिस्टेंट प्रोफेसर) के रूप में नौकरी की। कुछ समय तक मुखर्जी ने बांग्ला समाचार पत्र देशेर डाक में बतौर पत्रकार के रूप में भी काम किया।

1969 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे-
11 दिसम्बर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराटी में जन्मे प्रणव मुखर्जी 1969 में पहली बार Rajya Sabha MP के रूप में आए। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 1982 में कैबिनेट में Finance Minister नियुक्त किया। सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में प्रणव ने Union Cabinet की बैठकों की अध्यक्षता भी की। 1979 में वे राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता बने, और 1980 में सदन के नेता बनाए गए।

पद्मभूषण व सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार-

केंद्र सरकार ने प्रणव को 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा। मुखर्जी को 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड भी मिला। न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रणव 1984 में दुनिया के पांच सर्वोत्तम वित्त मंत्रियों में से एक थे।
राजीव से था मनमुटाव-

1984 में राजीव गांधी से मतभेदों के कारण उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस नामक एक नई पार्टी का गठन किया। हालांकि, 1989 में यह पार्टी कांग्रेस में ही शामिल हो गई। इसके बाद पीवी नरसिम्हाराव की सरकार में उन्हें 1991 में योजना आयोग का उपाध्यक्ष और 1995 में विदेश मंत्री का कार्यभार दिया गया।
2004 में पहली बार बने लोकसभा सदस्य-

2004 में लोकसभा चुनाव में प्रणव पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होकर लोकसभा का सदस्य बने। 2004 से 2006 तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार उन्होंने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। 2006-09 तक विदेश मंत्रालय और 2009-12 तक वित्त मंत्रालय में पूर्ण मंत्री रहे। यूपीए सरकार में उन्हें प्रमुख ‘संकटमोचक’ माना जाता था।
संगमा को शिकस्त देकर 2012 में बने राष्ट्रपति-

2012 में राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया। राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी पीए संगमा को हराकर राष्ट्रपति बने। प्रणव 2012 से 2017 तक देश के राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत के आग्रह पर गत वर्ष प्रणव नागपुर में संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था।

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