500 की बजाय 2500 क्विंटल का स्टॉक चाहते हैं बेलर्स

- जूट नियामक से लगाई गुहार, दावा आपूर्ति चेन को बनाए रखने में आ रही है दिक्कत
- जूट मिल मालिकों से समय पर भुगतान करने की अपील

By: Rajendra Vyas

Published: 26 Dec 2020, 11:10 PM IST

कोलकाता. व्यापारियों के संगठन जूट बेलर्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि 500 क्विंटल ही कच्चा जूट रखने के आदेश से कई दिक्कतें पेश आ रही हैं। जूट मिलों को कच्चे जूट की आपूर्ति में परेशानी हो रही है। संगठन का कहना है कि स्टॉक सीमित कर देने से उनके हाथ बंध गए हैं। संगठन के अध्यक्ष मदन गोपाल तोषनीवाल ने जूट उद्योग नियामक जूट आयुक्त से स्टॉक की सीमा 500 क्विंटल से बढ़ाकर 2500 क्विंटल करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि एक तरफ जूट मिल मालिकों के लिए स्टॉक की सीमा दो महीने से बढ़ाकर तीन महीने कर दिया गया, जबकि हमारी सीमा घटा दी गई। उन्होंने कहा कि हमने इस सिलसिले में जूट आयुक्त को पत्र लिखा है तथा फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है। संगठन के सचिव ए. के. पालित ने दावा किया कि उन जूट मिलों को कच्चे जूट को लेकर कोई दिक्कत नहीं हो रही है जो समय पर भुगतान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन मिलों के समक्ष परेशानी जरूर आई है जिन्होंने काफी रकम बकाया रखा है। उन्होंने मिल मालिकों से बकाया रकम का भुगतान समय पर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई जूट मिलों पर करोड़ों रुपए बकाया है। बेलर्स ऐसी स्थिति में फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। बकाया मिलने पर फिर कच्चे जूट की आपूर्ति कर रहे हैं।
कमेटी सदस्य भगवती प्रसाद मूंधड़ा ने कहा कि मिल मालिकों के रवैये से हमें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बकाया समय पर नहीं मिलने से हमारी स्थिति बिगड़ती जा रही है। मिल मालिकों को दूसरे पर दोष मढऩे से पहले अपने रवैये में सुधार लाना चाहिए।
बेलर्स का कहना है कि जूट आयुक्त को हालात के मद्देनजर उचित कदम उठाना चाहिए।
मिल मालिकों का यह दावा
उद्योग के सूत्रों के मुताबिक कच्चे जूट की आपूर्ति में रोड़े आने होने से मिलों का काम प्रभावित हुआ है। इस कारण रबी फसलों को रखने के लिए जूट की बोरियों की कमी पड़ सकती है। जूट मिल मालिकों के एक वर्ग का दावा है कुछ इकाइयों ने परिचालन बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें उचित मूल्य पर पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल सका। जूट उद्योग नियामक जूट आयुक्त ने गत 17 नवम्बर से स्टॉकिस्टों को 500 क्विंटल से अधिक कच्चे जूट नहीं रखने का आदेश दिया है। हालांकि, व्यापारियों ने कच्चे जूट स्टॉक सीमा आदेश को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। जूट नियामक को अदालत ने स्टॉक सीमा के अनुपालन के अधिक समय देने पर विचार करने को कहा है।
साल के आखिर में बैठक संभव
हाल में समूह के मंत्रियों की एक बैठक के दौरान राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि यदि आपूर्ति को सुव्यवस्थित नहीं किया जाता है, तो व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बैठक की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने की थी। राज्य कृषि विभाग के विश्लेषण के आधार पर, सरकार संभवत: इस महीने के अंत तक आयोजित होने वाली अगली बैठक में कच्चे जूट के लिए उचित मूल्य तय कर सकती है। हालांकि बैठक को लेकर अभी संशय है।

Rajendra Vyas Editorial Incharge
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