कछुओं की तस्करी में बंगाल बनता हब

- पहले कोलकाता, फिर बनगांव से कछुए भेजे जा रहे हैं विदेश

By: Vanita Jharkhandi

Published: 03 Jan 2019, 03:01 PM IST

 

कछुओं की तस्करी में पश्चिम बंगाल हब बनता जा रहा है। विदेशों में बढ़ती मांग के म²ेनजर बंगाल कॉरिडोर से होते हुए बंग्लादेश के ढाका से अन्य देशों में इसकी तस्करी हो रही है। हाल ही आपरेशन ड्रेगन के तहत इस बात का खुलासा हुआ है कि कछुओं की तस्करी में बंगाल सीमा से होते हुए बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हो रही है। 2016 से 2018 के बीच यह आपरेशन चलने के बाद 30 लोगों की गिरफ्तारी हुई है साथ ही नेटवर्क की भी जानकारी मिली है। इसमें अधिकारियों ने विभिन्न देशों के मछुआरों के साथ सम्पर्क साधा। मीठे पानी के कछुओं की मांग अधिक है। बंगाल और उत्तर प्रदेश की नदियों में 11 प्रकार के कछुआ पाए जाते हैं। उनकी मांग बहुत है।

क्या है ऑपरेशन ड्रेगन

वाइल्ड लाइफ जस्टिस कमीशन की ओर से गत दो सालों से गोपनीय रूप से जांच की है। तब कछुओं की तस्करी के नेटवर्क का पता लगाया गया है। इस आपरेशन को ही आपरेशन ड्रेगन का नाम दिया है। दो साल की मेहनत के बाद एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें बांग्लादेश व बंगाल के कोलकाता से करोड़ों डालर का व्यवसाय कछुओं की तस्करी के माध्यम से किया जा रहा है।
कैसे होता है काम

भारत के विभिन्न प्रान्तों व राज्यों से कछुओं को अवैध तरीके से पकड़ा जाता है। उसके बाद कोलकाता में कछुओं को जमा किया जाता है। इसके बाद जैसोर रोड होते हुए उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव पहुंचाया जाता है। उसके बाद नदी के किनारे पहुंचाया जाता है। फिर जल मार्ग से बांग्लादेश के ढाका स्थित सेफ हाउस में पहुंचाया जाता है। उसके बाद हवाई अड्डे के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाता है। यही से एशियाई देशों में तस्करी होती है।
आठ गिरोह कर रहे तस्करी

आठ गिरोह कुछओं की तस्करी कर रहे हैं। मीठे पानी के कछुए की सबसे बड़ी मांग चीन व हांगकांग में है। इसलिए तस्करी को बढ़ावा यही से मिल रहा है। भारत बांग्लादेश के साथ ही मलेशिया, पाकिस्तान तथा थाईलैंड तक नेटवर्क बना हुआ है। दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशिया में हवाई अड्डे व सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बड़ी संख्या में पकड़ा

आपरेशन ड्रेगन के तहत ३० तस्करों की गिरफ्तारी हुई है साथ ही 6000 कछुए भी बरामद हुए हैं। तस्करी को रोकने के लिए विशेष दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। उत्तर बंगाल के एडीजी आनंद कुमार का कहना है कि उत्तर बंगाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से घिरा हुआ है। यहां वन्यजीवों और जलचरों की तस्करी रोकने के लिए सभी जीआरपी और पुलिस थानों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। इस प्रकार के तस्करों का नेटवर्क देश से विदेश तक जुड़ा होता है।
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जांच के माध्यम से एकत्र किए गए सबूतों की महत्वपूर्ण मात्रा और डब्ल्यूजेसी की खुफिया जानकारी के गहन विश्लेषण ने व्यक्तिगत भूमिकाओं और नेटवर्क की गतिशीलता की गहन समझ प्रदान की है। जिससे जांच एजेंसियों को बड़े तस्करों को लक्षित करने में सक्षम बनाया गया है जो इस अपराध से सबसे अधिक लाभान्वित हुए हैं।

एस. स्टोनर, प्रबंधक, डब्ल्यूजेसी

Vanita Jharkhandi Reporting
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