पीएम मोदी की बैठक में इसलिए नहीं जाएंगी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।

कोलकाता.
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। पिछले एक महीने से चल रहे आंदोलन को और तेज करने की वह तैयारी में हैं। यही वजह है कि वह नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के मुद्दे पर 17 जनवरी को केंद्र सरकार की आहूत बैठक में हिस्सा नहीं लेंगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल का कोई भी प्रतिनिधि हिस्सा नहीं लेगा। बंगाल की सीएम ममता ने बुधवार को इसकी घोषणा की। नागरिकता संशोधित कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी(एनआरसी) और एनपीआर ते खिलाफ गत एक सप्ताह से धर्मतल्ला के रानी रासमणि एवेन्यू में चल रहे तृणमूल छात्र परिषद के धरना मंच से ममता ने स्पष्ट कर दिया कि उक्त मुद्दों के खिलाफ वह पहले से ही मुखर हैं। उल्लेखनीय है कि सीएए के खिलाफ देश व्यापी विरोध के बीच केंद्र सरकार एनपीआर पर काम शुरू करने जा रही है।

सूत्रों के अनुसार केवल पश्चिम बंगाल और केरल को छोड़ कांग्रेस शासित सहित अन्य राज्यों में एनपीआर का काम शुरू करने संबंधी अधिसूचना जारी की गई है। इसे लेकर नए सिरे से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सीएए और एनआरसी के खिलाफ कांग्रेस ने भी कड़ा तेवर दिखाया है। एनपीआर को देश भर में एनआरसी लागू करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। इधर, लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि एनपीआर का मतलब नागरिकत्व नहीं है। इसके तहत देश के लोगों के बारे में विस्तृत तथ्य संग्रह किया जाता है। 2011 में जनगणना से पहले 2010 में एनपीआर तैयार किया गया था।

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Prabhat Kumar Gupta Reporting
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