विपक्षी दलों ने किया हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत

विपक्षी दलों ने किया हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत

MANOJ KUMAR SINGH | Publish: Apr, 17 2018 08:13:28 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

विपक्षी दलों ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक को मंगलवार तक बढ़ाए जाने संबंधित कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

- भाजपा की नहीं जनता की हुई जीत- प्रताप बनर्जी

- राज्य के मनमानी के खिलाफ कोर्ट फैसला- रोबिन देव

कोलकाता

विपक्षी दलों ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक को मंगलवार तक बढ़ाए जाने संबंधित कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। फैसले को तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार की मनमानी के खिलाफ बताया।

प्रदेश भाजपा के महासचिव प्रताप बनर्जी ने सोमवार को कहा कि फैसला सिर्फ भाजपा की जीत नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता की जीत है। राज्य के लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने गए थे। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के गुण्डों ने उन पर हमले कर उन्हें नामांकन भरने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि पंचायत चुनाव नहीं हो या इसमें देर से हो। उनकी पार्टी चाहती है कि जल्द से जल्द मामले की सुनवाई हो और जल्द चुनाव हो, लेकिन चुनाव जब भी हो निष्पक्ष और शान्तिपूर्ण तरीके से हो।

राज्य चुनाव आयोग की ओर से नामांकन की अवधि एक दिन बढ़ाए जाने के अपने निर्देश वापस लेने के खिलाफ प्रताप बनर्जी ने भाजपा की ओर से हाई कोर्ट में मामला किया है। इस दिन उनके साथ हाई कोर्ट में उपस्थित पार्टी नेता मुकुल राय ने कहा कि यह जीत राज्य की जनता, संविधान और लोकतंत्र की जीत है। न्यायपालिका हमारे देश के संविधान की संरक्षक है। इस दिन हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा कर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार की ओर लोकतंत्र की हत्या किए जाने की कोशिश को नाकाम किया है।

माकपा नेता रोबिन देव ने हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार की मनमानी पर रोक करार दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत पर कब्जा करने के लिए तृणमूल कांग्रस और राज्य सरकार राज्य दबाव डाल कर राज्य चुनाव आयोग से मनमानी करा रही थी। हाई कोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से साबित होता है कि बंगाल में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। बिना केन्द्रीय बल के यहां पंचायत चुनाव ही नहीं कोई भी चुनाव निष्पक्ष और शान्तिपूर्ण तरीके से नहीं हो सकता।

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