कैग ने संग्रहालय और पोर्ट की खिंचाई की

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2017-18 के बीच हुए आधुनिकीकरण के कार्य के दौरान कई अमूल्य कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के लिए इंडियन म्यूजियम, कोलकाता तथा निकर्षण गतिविधियों में खामियों को लेकर कोलकाता बंदरगाह न्यास (श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह) की खिंचाई की है। कैग ने संग्रहालय की आलोचना करते हुए कहा कि इस परियोजना में संरक्षण की कोई उचित योजना नहीं बनाई गई थी

By: Rabindra Rai

Published: 24 Sep 2020, 10:10 PM IST

कहा, संरक्षण की कोई उचित योजना नहीं बनाई
पोर्ट के पास नहीं थी कोई रणनीतिक योजना

कोलकाता. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2017-18 के बीच हुए आधुनिकीकरण के कार्य के दौरान कई अमूल्य कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के लिए इंडियन म्यूजियम, कोलकाता तथा निकर्षण गतिविधियों में खामियों को लेकर कोलकाता बंदरगाह न्यास (श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह) की खिंचाई की है। कैग ने संग्रहालय की आलोचना करते हुए कहा कि इस परियोजना में संरक्षण की कोई उचित योजना नहीं बनाई गई थी। रिपोर्ट बुधवार को सदन के पटल पर रखी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी स्मारकों की मरम्मत संबंधी दिशा-निर्देशों एवं तय मापदंडों का संग्रहालय में जीर्णोद्धार के काम के दौरान पालन नहीं किया गया और यहां काम करने वाली एजेंसी को विरासत इमारतों का संरक्षण करने संबंधी विशेषज्ञता हासिल नहीं थी। कैग ने कहा कि जीर्णोद्धार के काम में उचित संरक्षण प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया जिसके परिणामस्वरूप अमूल्य कलाकृतियों को नुकसान पहुंचा। कैग ने मंजूर लागत से अधिक खर्च होने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट में उसने कहा कि 83.66 करोड़ रुपए की लागत में करने के लिए मंजूर किया गया काम 105.70 करोड़ में पूरा किया गया
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पोर्ट को हुआ इतना घाटा
कैग का आरोप है कि कतिपय खामियों के चलते श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह को 2013 से 2018 के दौरान 278.61 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। कैग ने कहा, यह देखा गया है कि 2013-14 से 2018-19 की अवधि के दौरान 81.68 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमएम3) के निकर्षण में 1,857.37 करोड़ रुपए का व्यय हुआ।
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खामियों को किया उजागर
उसने कहा कि इसमें से 12.25 एमएम-3 मलवा वापस शिपिंग चैनल में आ गया। यह 15 प्रतिशत का पुनर्चक्रणन हो गया। इससे केओपीटी की लागत 278.61 करोड़ रुपए बढ़ गई। कैग ने सरकार को हाल ही में सौंपी गयी रिपोर्ट में कहा कि केओपीटी के पास कोई रणनीतिक योजना नहीं थी। कैग ने ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीसीआईएल) के साथ ड्रेजिंग अनुबंध के निष्पादन में कमियों को भी उजागर किया।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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