कैंसर: दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल

दुनिया की सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारी कैंसर के मरीजों के मामले में पश्चिम बंगाल देश भर में दूसरे नंबर पर है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट-2000 के नाम से हाल ही जारी किए गए एक शोध अध्ययन में हुए इस खुलासे ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है।

By: Rabindra Rai

Published: 31 Jul 2021, 04:17 PM IST

नेशनल कैन्सर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट 2020 में हुआ खुलासा
- राज्य स्वास्थ्य विभाग के लिए नई चुनौती
कोलकाता. दुनिया की सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारी कैंसर के मरीजों के मामले में पश्चिम बंगाल देश भर में दूसरे नंबर पर है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट-2000 के नाम से हाल ही जारी किए गए एक शोध अध्ययन में हुए इस खुलासे ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। वर्ष 2018 में भारत में कैंसर के मामले 13.25 लाख थे जो 2020 में बढ़कर 13.92 लाख हो गए। यह रिपोर्ट इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर)की ओर से जारी की गई है।
कैंसर मे देश में पहले स्थान पर उत्तरप्रदेश है। आईसीएमआर की कैंसर रजिस्ट्री डेटा रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2,01,319 मामले व पश्चिम बंगाल 1,08,394 मामले कैंसर के दर्ज किए गए। बंगाल में कैंसर रोगियों की संख्या वर्ष 2019 में 103309 व 2019 में 105814 होते हुए अब 2020 में बढ़कर 108394 हो गई है। इस मामले में तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र व चौथे नंबर पर तमिलनाडु है।
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पुरुषों में मुंह, महिलाओं में स्तन कैंसर
इस अध्ययन में पता चला है कि पुरुषों में मुंह का कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर ज्यादा होता है। युवाओं में तंबाकू सेवन की बढ़ती दुष्प्रवृत्ति से भी ये मामले बढऩे लगे हैं। भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में अकेले तंबाकू जनित कैंसर से दस लाख लोगों की मौत हो गई जबकि वर्ष 2019 में ह्रदय से 17 लाख व फेफड़ों की बीमारी से 16 लाख मौतें दर्ज की गई।
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जीवन शैली का रोग कैंसर
कैंसर आमतौर पर जीवन शैली से जुड़ी बीमारी है।अनियंत्रित जीवन शैली, तंबाकू उत्पादों का उपयोग, अस्वास्थ्यकर आहार और वायु प्रदूषण शामिल हैं। भारत में कैंसर के मामलों में वृद्धि के कारण, केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों और स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसे राज्य सरकार के कार्यक्रमों के प्रयासों को पूरक बनाने की योजना बना रही है।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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