दस साल बाद जेल से छूटे देशद्रोह के मुजरिम से क्यों मिल रहे हैं तृणमूल नेता !

पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) ने गोटियां बिझानी शुरू कर दी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में झटका देने वाले जंगलमहल इलाके में पार्टी की संभावनाएं बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में जेल से छूटे पुलिस अत्याचार विरोधी समिति से जुड़े छत्रधर महतो (Chatradhar Mahto) और राज्य के मंत्री पार्थ चटर्जी की उनसे मुलाकात को इसी संदर्भ में जोड़ कर देखा जा रहा है।

कोलकाता.
लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अपने कमजोर इलाकों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। जंगलमहल, उत्तर बंगाल में अपना पिछला प्रदर्शन दोहराना पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। इस हालत में पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी की हाल ही में जेल से छूटे पीसीपीए नेता छत्रधर महतो से एकांत में हुई लंबी बातचीत के कई मायने निकाले जा रहे हैं। चुनावी अंकगणित में जंगलमहल से जुड़ी व उसके मुद्दों से लगभग ५० विधानसभा सीटें प्रभावित होती हैं। जिनमें से ज्यादातर पर लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया था। चुनावी हवा को अपने पक्ष में करने के लिए तृणमूल जंगलमहल के कुर्मी, आदिवासी मतदाताओं को साधने के प्रयास में हैं। छत्रधर महतो उन्हें कुर्मी मत सहेजने के लिए मुफीद लग रहे हैं। हालांकि महतो ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उनपर डोरे डालने से भाजपा की चिंता जरूर बढ़ी हुई है। वैसे तो भाजपा नेता पार्थ चटर्जी और महतो की मुलाकात को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक जंगलमहल में पुलिस प्रशासन का दायित्व संभाल चुकी और मौजूदा भाजपा नेता भारती घोष इस मुलाकात के बाद इलाके में बदल रही राजनीति की ओर इशारा जरूर करती हैं। भारती के मुताबिक जेल से छूटने के बाद महतो ने जनसम्पर्क शुरू किया है वे घर-घर जा रहे हैं। जंगलमहल में फिर से रक्तरंजित राजनीति शुरू होने की बू उन्हें मिल रही है और इसके पीछे वे तृणमूल कांग्रेस का हाथ बता रही हैं।

मुख्यमंत्री के काफिले में किया था विस्फोट
आप को बता दें कि वर्ष 2008 में सालबनी में जिंदल कारखाने के शिलान्यास कार्यक्रम से मिदनापुर लौटते समय बंगाल के तात्कालिक मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के काफिले को माओवादियों ने निशाना बनाया था। राष्ट्रीय राजमार्ग-60 पर बिछाई गई बारूदी सुरंग में विस्फोट किया गया था। पुलिस ने वर्ष 2009 में छत्रधर महतो समेत पीसीपीए के कई सदस्यों को गिरफ्त में लिया था। जिनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। 12 मई, 2015 में मिदनापुर जिला अदालत ने महतो को उम्रकैद की सुजा सुनाई थी। वर्ष 2019 के अगस्त महीने में कलकत्ता हाईकोर्ट ने छत्रधर महतो की आजीवन कारावास की सजा को 10 साल के कारावास में बदल दिया था। महतो 1 फरवरी 2020 को जेल से छूटे हैं।

ममता बनर्जी गई थी छत्रधर से मिलने
मुख्यमंत्री के काफिले पर हुए हमले के बाद पुलिस ने आरोपियों की खोज के लिए तलाशी अभियान चलाया था। जिसपर अत्याचार का आरोप लगा था। आंदोलन शुरू हुआ था। उस समय ममता छत्रधर व अन्य आंदोलनकारियों से मिलने जंगलमहल तक गई थीं।

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Paritosh Dube Desk
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