इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के नशे की गिरफ्त में बचपन

- बदल रहा बच्चों का स्वभाव, बन रहे जिद्दी
- हो रहे मोबाइल, लैपटॉप और कम्प्यूटर की लत का शिकार

By: Rajendra Vyas

Published: 21 Sep 2020, 06:59 PM IST

मनोज कुमार सिंह
कोलकाता. कोलकाता के सात साल का रीक चौधरी दूसरी कक्षा में पढ़ता है सो कर उठने के बाद से अपनी मां का मोबाइल लेकर कार्टून देखता या गेम खेलता है। मोबाइल से अलग करने पर वह गुस्सा कर चीखने लगता है और जिद कर मोबाइल ले लेता है। महानगर के एक निजी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढऩे वाले ऋषव गोयनका ऑनलाइन क्लास के बाद भी अपने पापा का लैपटॉप से अलग नहीं होता है। लैपटॉप छीन लेने पर वह जिद कर अपनी मां का मोबाइल लेकर गेम खेलता है। सिर्फ कोलकाता के रीक और ऋषव ही नहीं कोरोना काल में घर में कैद देश के विभिन्न शहरों में रहने वाले अधिकतर बच्चे घर में उपलब्ध मोबाइल, लैपटॉप और कम्प्यूटर की लत का शिकार हो रहे हैं। अधिकतर स्कूल बच्चे रोजाना लगभग तीन घंटे ऑनलाइन क्लास में व्यस्त रखते हैं। इसके बाद बच्चे मोबाइल पर गेम खेलते या कार्टून देखते हैं। नतीजा लॉकडाउन में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों विशेषकर मोबाइल का उपयोग दो से तीन गुना बढ़ गया है। बच्चों की शारीरिक गतिविधियां थम सी गई हैं। पिछले महीने हुए एक अध्ययन में जयपुर और राजस्थान के 12 शहरों के अलावा कोलकाता, दिल्ली और मुम्बई सहित देश के विभिन्न सात शहरों के 65 प्रतिशत बच्चे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आदी पाए गए हैं।
पैदा हो रहे हैं मानसिक विकार
मोबाइल के उपयोग बढऩे से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा रहा है। उनमें कई विकार पैदा हो रहे हैं। जयपुर के जेके लोन अस्पताल के एक अध्ययन के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक बच्चों में वजन बढऩे, सिरदर्द, दिन में नींद आना, थकान, शरीर या पीठ में दर्द और आंखों में दर्द व खुजली जैसी शारीरिक समस्याएं पैदा हो रही हैं।
नियमित आ रहे हैं फोन
अभिभावकों के नियमित फोन आ रहे हैं। वे दु:खद और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली कहानियां सुनाते हैं। दरअसल अधिक मोबाइल इस्तेमाल करने से बच्चों के दिमाग में एक तरह से हलचल पैदा होती है। वे जो गेम खेलते हैं और जो वीडियो देखते हैं उनके अनुरूप उनमें भावनाएं पैदा होती हैं।
-रेश्मी सेन शर्मा, मनोवैज्ञािनक

एकाग्रता धीरे-धीरे कम होती है
वास्तव में बच्चों के लिए दो घंटे से अधिक समय मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करना ठीक नहीं है। इससे अधिक समय तक इस्तेमाल करने से उनके दिमाग में उत्तेजना पैदा होती है। उनकी एकाग्रता धीरे-धीरे कम होने लगती है। उनमें मानसिक और व्यवहारिक विकार पैदा होने लगते हैं। घर से बाहर नहीं निकलने के कारण भी उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।
- सौविक चक्रवर्ती, बाल मनोवैज्ञानिक

Rajendra Vyas Editorial Incharge
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