विश्व में पहली बार होगा योग-श्रीमद्भागवत का संगम!

kolkataबड़ाबाजार में 20 से 26 मई तक भागवत कथाâ योगाचार्य राजेश व्यास की पहल

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 13 Mar 2018, 03:51 PM IST


कोलकाता. योग और भागवत दोनों ही कृष्ण से हंै। योगाचार्य राजेश व्यास ने अपने इस कथन के मद्देनजर योग और श्रीमद्भागवत के संयुक्त आयोजन की पहल की है, जो सम्भवतया विश्व में पहली बार होगा। 20 से 26 मई तक भागवत कथा और योग शिविर 21 से 25 मई तक होगा। बड़ाबाजार स्थित सत्संग भवन में कृष्ण योग ट्रस्ट के अंतर्गत होने वाले इस संयुक्त आयोजन में प्रात: कालीन सत्र में योगाभ्यास होगा। 12 वर्षों से योग की अलख जगा रहे एवं 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रूप से योग के जरिए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से लाभान्वित कर चुके प्रवासी राजस्थानी व्यास योगाभ्यास कराते हुए लोगों को इसके लाभों से अवगत कराएंगे। इस योग यात्रा के दौरान वे सेना, कोलकाता पुलिस, साहा इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स, रोटरी क्लब इंटरनेशनल जैसे कई संस्थानों में योगाभ्यास करा चुके हंै, जिनमें सामान्य वर्ग से लेकर छात्र, व्यवसायी, शिक्षक, डॉक्टर, वकील, वैज्ञानिक, आईपीएस, राजनीतिक हस्तियों एवं विदेशी सैलानी शामिल हैं। संयुक्त आयोजन के दोपहर सत्र में प्रयाग के माघ मेले में 2 कथाओं के वाचन के साथ 86 कथाएं करा चुके वृन्दावनवासी भागवताचार्य प्रभाकर महाराज के सान्निध्य में भागवत कथा होगी। व्यास ने कृष्ण योग ट्रस्ट के बारे में बताया कि गत वर्षों से जारी योग यात्रा को सुसंगठित, प्रभावशाली एवं द्रूत गति से आगे बढ़ाकर समाज-देश के अंतिम नागरिक को लाभान्वित करने के उद्देश्य से इस ट्रस्ट की स्थापना की गई है। इसके साथ ही देशी गायों, इनके दूध की उपयोगिता, गोसेवा, गोसंरक्षण, इसके भौतिक-आध्यात्मिक लाभ के प्रचार-प्रसार एवं मिलावट रहित दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। व्यास ने बताया कि समाजसेवी लक्ष्मीकांत तिवारी, काशीनाथ पांडेय, सुशील पुरोहित एवं रामगोपाल मिहारिया (भागवत कथा के संरक्षक) के संरक्षण में आयोजन होगा।

क्या है योग ?
योग शब्द संस्कृत धातु 'युज' से निकला है, जिसका मतलब है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन। योग, भारतीय ज्ञान की 5 हजार वर्ष पुरानी शैली है। कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम मानते हैं, जहां लोग शरीर को मोड़ते, मरोड़ते, खिंचते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। यह वास्तव में केवल मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता का खुलासा करने वाले इस गहन विज्ञान के सबसे सतही पहलू हैं। योग 10 हजार साल से भी अधिक समय से प्रचलन में है। उपनिषद, बृहदअरण्यक में भी, योग का हिस्सा बन चुके, विभिन्न शारीरिक अभ्यासों का उल्लेख मिलता है। योग के वर्तमान स्वरूप के बारे में, पहली बार उल्लेख कठोपनिषद में आता है।
योग धीरे-धीरे एक अवधारणा के रूप में उभरा और भगवद गीता के साथ साथ, महाभारत के शांतिपर्व में भी योग का विस्तृत उल्लेख मिलता है। २० से भी अधिक उपनिषद और योग वशिष्ठ उपलब्ध हैं, जिनमें महाभारत और भगवद गीता से भी पहले से ही, योग के बारे में, सर्वोच्च चेतना के साथ मन का मिलन होना कहा गया है। हिंदू दर्शन के प्राचीन मूलभूत सूत्र के रूप में योग की चर्चा की गई है और शायद सबसे अलंकृत पतंजलि योगसूत्र में इसका उल्लेख किया गया है। पतंजलि को योग के पिता के रूप में माना जाता है और उनके योग सूत्र पूरी तरह योग के ज्ञान के लिए समर्पित रहे।

 

 

Shishir Sharan Rahi Reporting
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