सत्ता में जल्द वापसी नहीं होगी यह मानकर नेता छोड़ रहे हैं कांग्रेस - अधीर

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर चौधरी (Adhir Choudhary )का मानना है कि कांग्रेस के कुछ युवा व अतिमहत्वाकांक्षी नेताओं को इस बात की अनुभूति हो रही है कि कांग्रेस निकट भविष्य में केन्द्र की सत्ता में नहीं आने वाली इसलिए वे पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं।

By: Paritosh Dube

Updated: 24 Jul 2020, 02:57 PM IST

कोलकाता. लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी के कुछ युवा व अतिमहत्वाकांक्षी नेताओं को ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस निकट भविष्य में केन्द्र की सत्ता में नहीं आने वाली है। इसलिए वे पार्टी छोड़ रहे हैं।
अधीर रंजन का यह बयान उस समय आया है जब राजस्थान में राजनीतिक उठापटक जारी है। पार्टी नेता सचिन पायलट बागी विधायकों के साथ सत्ता के उलटफेर की कोशिश में लगे हुए हैं।
बंगाल की बहरमपुर संसदीय सीट से चुने गए अधीर का मानना है कि ऐसे नेताओं के पार्टी छोडऩे से कांग्रेस को अस्थाई तौर पर नुकसान हो सकता है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि अनुशासन व विचारधारा से समझौता कर व्यक्तिगत आकांक्षा की संतुष्टि चाहने वाले नेताओं में विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता की कमी है।
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महत्वाकांक्षा की संतुष्टि के लिए विकल्प तलाशरहे कुछ नेता
कांग्रेस नेता ने संभावना जताई कि कुछ और युवा नेता पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं। अधीर रंजन ने कहा कि पार्टी में कुछ ऐसे अतिमहत्वाकांक्षी युवा नेता है जो इस बात से बेचैन हैं कि उन्हें पार्टी से उन्हें कम मिला है इसलिए वे अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की संतुष्टि के लिए अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
अधीर रंजन के मुताबिक ऐसा इसलिए हो रहा है कि उन्हें लगता है कि कांग्रेस केन्द्र की सत्ता में जल्द नहीं आने वाली है, इसलिए पार्टी उनकी मांग पूरी नहीं कर पाएगी। यही वजह है कि युवा नेता पार्टी बदल रहे हैं या उसकी योजना बना रहे हैं।
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सिंधिया, पायलट की कभी उपेक्षा नहीं हुई
ज्योतिरादित्य सिंधिया व सचिन पायलट के संबंध में उन्होंने कहा कि दोनों की पार्टी में कभी भी उपेक्षा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में ऐसे कई क्षमतावान नेता होते हैं जिन्हें पार्टी से आपेक्षित महत्व नहीं मिलता है तो क्या ऐसे नेता सत्ता का स्वाद चखने के लिए पार्टी छोड़ देते हैं।
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सिंधिया ने विधानसभा जिताया तो लोकसभा कैसे हार गए
अधीर रंजन ने उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जितवाए थे क्योंकि वे प्रचार अभियान समिति के मुखिया थे। संसदीय दल के नेता ने कहा कि यदि ऐसा होता तो सिंधिया लोकसभा चुनाव कैसे हार जाते।
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तो राजस्थान लोकसभा के नतीजे खराब क्यों हुए
राजस्थान में सचिन पायलट को वहां मिली विधानसभा जीत का इकलौता कारण मानने से इंकार करते हुए अधीर ने कहा कि राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलती है। यदि पायलट वर्ष 2018 में राजस्थान सत्ता परिवर्तन के एकमात्र कारण होते वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब नतीजे नहीं आते।
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पुराने बनाम युवा की खेमेबाजी नहीं
कांग्रेस में पुराने बनाम युवा नेताओं की खेमेबाजी को अस्वीकार करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि देश की एक भी ऐसी पार्टी बताइए जिसके सारे नेता एक आयु वर्ग के हों। सभी राजनीतिक दलों में युवा व अनुभवी नेताओं का मिश्रण होता है। जब भाजपा में अटल-आडवणी युग था तब नई पीढ़ी के नरेन्द्र मोदी व मौजूदा नेतृत्व को तैयार किया गया था।
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तो महत्वपूर्ण पद क्यों सौंपते
अधीर रंजन ने उस दावे को गलत बताया जिसमें कहा जाता है कि सिंधिया और पायलट को इसलिए किनारे किया गया ताकि वे राहुल गांधी के नेतृत्व के लिए संभावित खतरा न बन सकें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह दावा बिलकुल गलत है यदी राहुल गांधी को उनसे खतरा होता तो वे उन्हें सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण काम नहीं सौंपते।
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नहीं है नेतृत्व का संकट
कांग्रेस के समक्ष मौजूद समस्याओं का कारण क्या उसके नेतृत्व के संकट से जुड़ा हुआ है, इस प्रश्न के जवाब में पांच बार के सांसद अधीर रंजन ने कहा कि पार्टी में नेतृत्व का संकट मीडिया की उपज है। पार्टी की नेता सोनिया गांधी है। उनकी क्षमता पर किसी को शक नहीं होना चाहिए। वर्ष २००४ से २०१४ तक कांग्रेस का शासन केन्द्र पर रहा। इन दोनों चुनावों को सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही जीता गया था।
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गांधी परिवार ही संभाले बागडोर
कांग्रेस की बागडोर अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से कौन लेगा, इस प्रश्न के उत्तर में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य चौधरी ने कहा कि पार्टी में कई अच्छे नेता हैं पर उनमें गांधी परिवार के कद व करिश्मे की कमी है। गांधी परिवार कांग्रेस को जोड़ कर रखने वाली ताकत है।पार्टी चाहती है कि गांधी परिवार ही उसे नेतृत्व प्रदान करे। अधीर रंजन ने कहा कि पिछले वर्ष सोनियाजी ने अच्छा काम किया है। यदि राहुल गांधी बागडोर संभालना चाहें तो वह काम कभी भी कर सकते हैं।
राहुल गांधी के अंशकालिक राजनीतिज्ञहोने के दृष्टिकोण से असहमत अधीर ने कहा कि यह सब भाजपा के कहने पर मीडिया का एक वर्ग कहतारहता है। चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी इकलौते नेता हैं जो लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। जब कांग्रेस सत्ता में आएगी तो राहुल गांधी महान राजनेता कहे जाएंगे।

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