4 करोड़ रेहड़ी-खोमचे वालों की जीविका पर संकट गहराया

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन से देश में रेहड़ी-खोमचे वालों (स्ट्रीट वेन्डर्स) का व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद आदि शहरों के फुटपाथों पर जहां पहले इनकी दुकान सुबह से लेकर देर रात तक सजी रहती थी, आज सन्नाटा पसरा हुआ है। बड़ी संख्या में रेहड़ी-खोमचे वाले अपने गांव लौट गए हैं।

By: Rabindra Rai

Published: 30 Aug 2020, 04:39 PM IST

कोरोना ने देश में हॉकर व्यवसाय की कमर तोड़ी
मेट्रो शहरों के फुटपाथ पर नहीं लगा पा रहे दुकान
कोलकाता.
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन से देश में रेहड़ी-खोमचे वालों (स्ट्रीट वेन्डर्स) का व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद आदि शहरों के फुटपाथों पर जहां पहले इनकी दुकान सुबह से लेकर देर रात तक सजी रहती थी, आज सन्नाटा पसरा हुआ है। बड़ी संख्या में रेहड़ी-खोमचे वाले अपने गांव लौट गए हैं।
लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील के बाद कुछ रेहड़ी-खोमचे वाले अपनी दुकानें जरूर लगा रहे हैं, लेकिन खरीदार काफी कम हैं। पांच महीने से अधिक समय तक व्यवसाय बंद होने के कारण अधिकांश की पूँजी खत्म हो गई है। जिनके पास थोड़ी-बहुत पूँजी है भी तो उन्हें माल नहीं मिल रहा है। देश के करीब ४ करोड़ रेहड़ी-खोमचे वालों की जीविका पर संकट गहरा गया है।
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लोगों पर निर्भर व्यवसाय
केन्द्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के सर्वे के अनुसार 1997 में देश में रेहड़ी-खोमचे वालों की संख्या लगभग 1 करोड़ थी। वर्तमान में देश में इनकी संख्या 4 करोड़ के आसपास है। इनमें से 2.75 करोड़ शहरी इलाकों में हैं। बाकी ग्रमीण इलाकों में है। ये शहर के फुटपाथ पर दुकानें लगाकर अपना एवं अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लोगों की सामान्य गतिविधियों पर इनका व्यवसाय निर्भर है।
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सब की हालत दयनीय
केन्द्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के अनुसार 1997 में मुंबई में 250,000, दिल्ली में 450,000, कोलकाता, 150,000 से अधिक और अहमदाबाद, 100,000 रेहड़ी-खोमचे वाले थे। कोरोना संकट से पहले सभी खुशहाल थे। आज सब की हालत दयनीय है।
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इनका कहना है
लॉकडाउन से सबसे अधिक नुकसान रेहड़ी-खोमचे वालों को हुआ है। सब्जी और फल विक्रेताओं को छोड़कर 80 प्रतिशत की दुकानें अभी ूतक नहीं खुली हैं। केंद्र सरकार ऋण दे रही है, लेकिन इससे नुकसान की भरपाई सम्भव नहीं है। केंद्र सरकार को इनको अगले 6 माह तक प्रतिमाह 5 हजार रुपए का भत्ता देना चाहिए। कई बार इस बावत पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है।
शक्तिमान घोष, नेता,हॉकर संग्राम कमेटी

Rabindra Rai Editorial Incharge
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