करेंसी बिल्डिंग व मेटकफ हॉल बनेंगे कला व ऐतिहासिक केंद्र

करेंसी बिल्डिंग व मेटकफ हॉल बनेंगे कला व ऐतिहासिक केंद्र

MANOJ KUMAR SINGH | Publish: Sep, 08 2018 11:23:05 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

करेंसी बिल्डिंग में राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा बनेगा और मेटकॉफ हॉल में प्रदर्शित होगा कोलकाता का इतिहास

संभवत: सितंबर के मध्य तक करेंसी बिल्डिंग सौप दिया जाएगा। इसके बाद इस भवन में आधुनिक भारतीय मूर्ति कला के अग्रणी मूर्तिकार रामकिंकर बेज के रेखा चित्रों और मूर्तियों की प्रदर्शनी लगाने की योजना है। मेटकॉफ हॉल में कलकत्ता से कोलकाता तक के इतिहास को संजोया जाएगा और उसकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें रखी गई एक लाख पुस्तकों को मरम्मत के लिए भेजी गई हैं। हॉल में प्रदर्शनी लगने पर उन किताबों के अक्षर जीवंत हो उठेंगे।

 

कोलकाता

कोलकाता का डलहौसी पुराने औपनिवेशिक भवनों का केन्द्र है। एशिया का यह इकलौता इलाका है, जहां आस-पास में सबसे अधिक औपनिवेशिक भवनें हैं, जिसमें करेंसी बिल्डिंग और मेटकॉफ हॉल भी शामिल हैं। दोनों भवनों का निर्माण 19 वीं शताब्दी में किया गया। छह साल साल पहले करेंसी बिल्डिंग का जीर्णोद्धार किया गया। उक्त दोनों धरोहर भवन जल्द ही कला और शहरी इतिहास का संग्रहालय और दीर्घा बन जाएंगे।
डलहौसी स्क्वायर स्थित तीन तल्ला करेंसी बिल्डिंग वर्ष 1833 बना है। इटालियन शैली में बनी इस बिल्डिंग में इटली के वेनिस शहर की शैली वाली खिड़कियां और लोहे के गेट हैं। एक समय यह भारत के सबसे पुराने बैंकों का भवन था, जिसमें आग्रा बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) शामिल था। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि करेंसी बिल्डिंग कभी भी टकसाल नहीं रही, लेकिन इसमें मुद्राएं रखी जाती थी। इसलिए इसे करेंसी बिल्डिंग कहा जाता था। वर्ष 1937 तक यह आरबीआई के कब्जे में रहा। जिसके बाद यह पूरी तरह वंचित रहा और जर्जर हो कर इसका केन्द्र हिस्सा ढह गया। तब आरकेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने इसके जीर्णोद्धार करने के लिए 2005 में इसे अपने कब्जे में ले लिया था। लेकिन अब यह राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (एनजीएमए) का कार्यालय बनने जा रहा है। करेंसी बिल्डिंग में एनजीएमए के कार्यालय खुलने के बाद एनजीएमए ने इस भवन में वृहद कला प्रदर्शनी करने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा के महानिदेशक अदवैत गडऩायक ने बताया कि संभवत: सितंबर के मध्य तक करेंसी बिल्डिंग सौप दिया जाएगा। इसके बाद इस भवन में आधुनिक भारतीय मूर्ति कला के अग्रणी मूर्तिकार रामकिंकर बेज के रेखा चित्रों और मूर्तियों की प्रदर्शनी लगाने की योजना है।

करेंसी बिल्डिंग से करीब 150 से 200 मीटर की दूरी पर डलहौसी के स्ट्रैंड रोड और हेयर स्ट्रीट के क्रॉसिंग पर स्थित मेटकाफ हॉल है। वर्ष 1840 से 1844 में बने इस हॉल में प्रचीन ग्रीक शैली कोरिंथियन में बने 30 खम्भे हैं। इसका नाम वर्ष 1835-36 के भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड मेडकॉफ के नाम पर रखा गया है। एएसआई के कोलकाता सर्कल सुपरिंटेंडेट जी महेश्वरी ने बताया कि मेटकॉफ हॉल में कलकत्ता से कोलकाता तक के इतिहास को संजोया जाएगा और उसकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें रखी गई एक लाख पुस्तकों को मरम्मत के लिए भेजी गई हैं। हॉल में प्रदर्शनी लगने पर उन किताबों के अक्षर जीवंत हो उठेंगे।

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