राजनीतिक रंगों से लेकर आस्था के फूलों से सजे पंडाल

विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा की रंगत कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में देखी जा रही है। पूजा में राजनीतिक रंग से लेकर आस्था के फूल बिखरे हैं। दुर्गा की मूर्ति को कहीं सोने तो कहीं चांदी के आभूषणों से सजाया गया है।

By: Rabindra Rai

Published: 11 Oct 2021, 12:26 AM IST

दुर्गा की मूर्ति को कहीं सोने तो कहीं चांदी के आभूषण से सजाया
विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा की बंगाल में रंगत
कोलकाता. विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा की रंगत कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में देखी जा रही है। पूजा में राजनीतिक रंग से लेकर आस्था के फूल बिखरे हैं। दुर्गा की मूर्ति को कहीं सोने तो कहीं चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। महानगरवासी पूरी तरह दुर्गोत्सव के रंग में रंग गए हैं। दुर्गा पूजा के कई आयोजकों ने इस बार महानगर में किसान आंदोलन, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और भारत के विभाजन जैसे मुद्दों को आधार बनाकर अपने पंडालों और मूर्तियों को तैयार किया है।
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शरणार्थियों का पलायन
नाकतला उदयन संघ ने अपने पंडाल की थीम ट्रेन से शरणार्थियों का पलायन रखा है। संघ के प्रवक्ता सम्राट नंदी ने कहा कि हमने विस्थापित लोगों की पीड़ा को दर्शाने के लिए पाकिस्तान से शरणार्थियों को लेकर आने वाली एक ट्रेन को फिर से बनाया है।
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विस्थापित लोगों की दुर्दशा
बेहला के बरिशा क्लब ने विस्थापित लोगों की दुर्दशा को उजागर करते हुए एनआरसी पर अपनी पूजा का विषय रखा है। भागेर मां (विभाजित मां) शीर्षक से, देवी की चिंताग्रस्त दिखने वाली मूर्ति सैकड़ों माताओं की दुर्दशा का प्रतीक है, जिन्हें अपना घर छोड़कर अनिश्चितता की राह पर बढऩा पड़ा। क्लब के रिंटू दास ने कहा कि विभाजन के दिन हमें फिर से परेशान कर रहे हैं क्योंकि इस देश को सदियों से अपना घर बनाने वाले लोगों को वापस भेजने की बात हो रही है। आशा है कि इतिहास दोहराया नहीं जाएगा।
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जूतों के इस्तेमाल पर विवाद
दमदम पार्क भारत चक्रक्लब पूजा के आयोजकों ने पंडाल के रास्ते में ट्रैक्टर की प्रतिकृति रखकर किसानों के आंदोलन को दर्शाया है। ट्रैक्टर के दो हिस्से हैं, जिन पर आंदोलन में मारे गए किसानों के नाम लिखे हैं। पूजा ने आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस कार्रवाई को दर्शाने के लिए सैकड़ों जूतों के इस्तेमाल पर भी विवाद खड़ा कर दिया। भाजपा ने आयोजकों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और मांग की कि पंडाल से जूते तुरंत हटाए जाएं।
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हर रास्ता दर्शन के लिए
महानगर में पंचमी की शाम को ही सप्तमी जैसी भीड़ रास्तों पर पंडालों की ओर जाती दिखी। शहर का हर रास्ता पूजा दर्शन के लिए घरों से निकले श्रद्धालुओं से पटा रहा। नए कपड़ों में सुसज्जित लोग एक के बाद दूसरे पंडालों की ओर गए। जहां कतार लगाकर कोरोना गाइडलाइन का पालन करते दर्शन किए। इधर पूजा पंडालों में ढाकियों की लय ताल के साथ की जा रही प्रस्तुति ने पूरे शहर को उत्सवी रंग में रंग दिया। महानगर की मुख्य सड़कों समेत चौराहों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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