दुर्गापूजा: जीएसटी से बिगड़ा आयोजकों का मूड

एक देश एक कर प्रणाली जीएसटी लागू कर केंद्र सरकार के कर सुधार की पहल ने महानगर की दुर्गापूजा कमेटियों का बजट बिगाड़ दिया है

By: शंकर शर्मा

Published: 11 Sep 2017, 10:16 PM IST

कोलकाता. एक देश एक कर प्रणाली जीएसटी लागू कर केंद्र सरकार के कर सुधार की पहल ने महानगर की दुर्गापूजा कमेटियों का बजट बिगाड़ दिया है। जीएसटी लागू होने से दुर्गापूजा उत्सव पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ पूजा कमेटियों की आय के जरिए मंे रुकावट आई है दूसरी ओर उनकाखर्च बढ़ गया है।

राज्य के पंडालों पर खर्च का हिसाब 500 से 600 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। लेकिन पूजा कमेटियों को मिलने वाले प्रायोजक ५0 फीसदी कम हो गए हैं। दुर्गाेत्सव फोरम के अनुसार, महानगर में एक पंडाल पर कम से कम 10-15 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हंै।

अधिकतम खर्च एक करोड़ तक हो रहा है। अब तक लगभग 3600 पंडालों का पंजीकरण हुआ है। कमेटियों को होर्डिंग्स, बैनर्स के जरिए प्रायोजकों से अच्छी खासी राशि मिलती थी। जो कि इस बार कम हो गई है। स्टालों की संख्या भी घटी है।

पंडाल के आसपास गेट लगाने के लिए अमूमन एक से डेढ़ लाख रुपए तक व होर्डिंग के लिए पांच हजार से 30 हजार तक की राशि का भुगतान प्रायोजक पूजा के दौरान कर देते थे लेकिन इस बार प्रायोजकों में इसे लेकर उत्साह नहीं है।

प्रायोजक नहीं मिल रहे
जीएसटी का असर पूजा पर पड़ा है। पूजा के जल्दी आने से भी नुकसान हो रहा है। थीम के लिए कमेटियां खर्च पर अंकुश नहीं लगा रही हैं लेकिन प्रायोजक मिलने मुश्किल हो रहे हंै। पार्थ घोष, अध्यक्ष, फोरम फॉर दुर्गोत्सव

खर्च बढ़ा
जीएसटी के कारण कमेटियों का खर्च बढ़ गया है। प्लाईवुड से लेकर बटन व अन्य चीजों पर टैक्स पहले की तुलना में दोगुना हो गया है। विकास मजूमदार, मुख्य आयोजक, कॉलेज स्ट्रीट


दुर्गाेत्सव प्रायोजक हुए कम
होर्डिंग्स व बैनर लगाने और पूजा को अपना नाम देने के लिए पिछले वर्ष तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों में होड़ लगी हुई थी। इस बार जिस भी कम्पनियों के सामने गए, उसने खुद को जीएसटी की तिकड़म में व्यस्त बता दिया। पिछले बार की तुलना में 50 फीसदी स्पांसरशिप कम हो गई है। सुदीप्त कुमार, अध्यक्ष, देशप्रिय पार्क

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