बंगाल में अधिकारियों को हटाने के निर्णय पर कायम निर्वाचन आयोग

केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के इशारे पर राज्य के चार शीर्ष पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश देने का आरोप लगाया था।

By: Prabhat Kumar Gupta

Published: 10 Apr 2019, 05:59 PM IST

- अधिकारियों का तबादला हमारा अधिकार

-ममता बनर्जी के आरोपों पर निर्वाचन आयोग का टका सा जवाब

कोलकाता.

केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के इशारे पर राज्य के चार शीर्ष पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश देने का आरोप लगाया था। आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि लोकसभा या विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पश्चात् पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला करने का उसे अधिकार है। तबादले के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी के पत्र में लगे आरोपों पर आयोग ने कहा कि तबादले का निर्णय शीर्ष अधिकारियों में से एक के अलावा विशेष पुलिस पर्यवेक्षक विवेद दुबे से प्राप्त रिपोर्ट तथा संचयीमान सूचनाओं पर आधारित था। आयोग ने बनर्जी से कहा कि चुनाव कानून के अनुसार आदर्श आचार संहिता के दौरान उसे अधिकारियों को स्थानांतरित करने और नियुक्त करने का पूरा अधिकार है। उप चुनाव आयुक्तों में से एक ने सीएम ममता को पत्र के माध्यम से कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 28 ए के तहत आयोग ने अधिकारियों का तबादला किया है। आयोग ने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया है। उल्लेखनीय है कि तृणमूल सुप्रीमो बनर्जी ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर कोलकाता और विधाननगर पुलिस आयुक्तों समेत चार आईपीएस अधिकारियों के तबादले पर विरोध प्रकट किया था। उन्होंने पत्र में आयोग के निर्णय को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ अत्यंत मनमाना, प्रेरित और ‘पक्षपातपूर्ण’ करार दिया था। बनर्जी ने सवाल उठाया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे पर क्या आयोग इसकी जिम्मेदारी लेगा?’ ममता ने उक्त निर्णय पर फिर से विचार करने तथा जांच की मांग की थी।

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