72 years of Independence : आजादी के वर्षों बाद भी गुमनामी की जिन्दगी जीने के लिए है मजबूर

72  years of Independence : आजादी के वर्षों बाद भी गुमनामी की जिन्दगी जीने के लिए है मजबूर

Rakesh Mishra | Publish: Aug, 14 2019 05:36:14 PM (IST) | Updated: Aug, 14 2019 10:23:26 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India


-एक बस्ती ऐसी जहां न है बिजली और न पीने का पानी
-महिलाओं को खुले में जाना पड़ता है शौच


कोलकाता (Kolkata)

आजादी के सात दशक गुजरने के बाद भी इस इलाके के लोग गुमनामी की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं। कोलकाता से महज 14 किलोमीटर दूर हुगली जिले के उत्तरपाड़ा कोतरंग नगरपालिका अंर्तगत वार्ड नम्बर 1 में शकारीपाड़ा, दासपाड़ा व गावतल्ला बस्ती की सूरत नहीं बदली है। बस्ती सरकारी उपेक्षा की मार झेल रही है। तीन सौ परिवार लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाते हैं पर उन्हें कोई नागरिक सेवा या लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बस्ती निवासी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्हें पेयजल, बिजली नहीं मिल रही है। बस्ती के अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। 2-3शौचालय बनाए गए थे, उनमें न पानी है न दरवाजा। लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। उन्हें अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है। बस्ती में 206 वयस्क, 36 बुजुर्ग, 103 बच्चे हैं। बस्ती के तीन में से एक ट्यूबवेल खराब है। संस्थागत प्रसव न होने के कारण यहां जन्मे बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है।

क्या कहते हैं बस्तीवासी
बस्ती में रहने वाली पचेला घोष का कहना है कि माता-पिता ईंट भट्टे में मजदूरी करते थे। यहीं पर पैदा हुई, यहीं पर उसकी शादी हुई है। बस्ती की दशा पहले जैसे थी, वैसे आज भी है। घर चलाने के लिए औरतों को भी मजदूरी करना पड़ता है। शशिया खातून बताती है कि राशन कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड है पर सुविधा कुछ भी नहीं मिलती। ईंट भट्टा मालिक उनसे बिजली की प्रति यूनिट के लिए 12 रुपए लेता है। सुमरी साहू का कहना है कि यहां के लोगों को सिर्फ मतदान के समय याद किया जाता है। न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय की। बस्ती में रहने वाली मनि भगत, सीमा उराव , रीना उरांव व सोना उरांव ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बस्ती की महिलाओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। बस्ती में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। खाना बनाने के लिए सूखे लडक़ी का इस्तेमाल करते हैं। बरसात में कमर तक जल जमाव होता है। बस्ती के बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के वजह से उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं मिल रहा है।

संदीप चौधरी, स्थानीय समाजसेवी
बस्ती निवासी इलाके में सामाजिक संस्थाओं को काम करने भी नहीं दिया जा रहा है। कुछ लोग नहीं चाहते कि बस्ती के लोगों का विकास हो।

क्या कहते हैं चेयरमैन : बस्ती अवैध है। नगर पालिका दूसरे की जमीन पर काम नहीं कर सकता। बस्तीवासी आवेदन करें तो उन्हें सेवा मुहैया कराई जा सकती है।

दिलीप यादव, चेयरमैन , उत्तरपाड़ा कोतरंग नगरपालिका

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