कानून-व्यवस्था पर विश्वास करें भारती घोष- न्यायाधीश

कानून-व्यवस्था पर विश्वास करें भारती घोष- न्यायाधीश

MANOJ KUMAR SINGH | Publish: Sep, 03 2018 11:02:50 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

यूएन शान्ति सेना में रहीं हार्वर्ड की स्नातक हैं भारती घोष

की घोष के पति की जमानत याचिका खारिज
कोलकाता

कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जलमाल बागची ने रंगदारी वसूलने की आरोपी और भूमिगत हुईं पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष को सोमवार को कानून के सामने आ कर कानूनी लड़ाई लडऩे की नसीहत दी। साथ ही उन्होंने भारती घोष के पति की जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस दिन हाईकोर्ट में भारती घोष के पति एमएवी राजू की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जयमाल्य बागची ने कहा कि भारती घोष क्यों छिपी हुई हैं। वे सामने आएं और अपने ऊपर लगे आरोप के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ें। न्यायाधीश बागची ने भारती घोष को उस समय उक्त नसीहत दी, जब एमएवी राजू की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि राजू और उनकी पत्नी भारती घोष, दोनों निर्दोष है। इन्हें किसी उद्देश्य से प्रेरित हो कर फंसाया और परेशान किया जा रहा है। इस पर न्यायाधीश बागची ने कहा कि भारती घोष एक कर्तव्यनिष्ठ बल की सदस्य होते हुए गैर-कानूनी तरीके से भूमिगत हुई हैं। कानून के सामने आ कर कानूनी लड़ाई करें। इससे पहले सरकारी वकील ने एमएवी राजू को जमानत देने का विरोध कड़ा विरोध किया। वकील ने न्यायाधीश बागची से कहा कि राजू को जमानत देने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे पहले अपने बेटे के पास जाने के बहाने राजू इंदौर चले गए थे और वहां पर रंगदारी वसूलने की आरोपी भारती घोष के खिलाफ गुप्त बयान दर्ज कराने वाले दो व्यक्तियों से मुलाकात की थी। इस कारण न्यायाधीश संजीव बंद्योपाध्याय ने राजू की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश बागची ने राजू की जमानत याचिका खारिज कर दी।

यूएन शान्ति सेना में रहीं हार्वर्ड की स्नातक हैं भारती घोष

हार्वर्ड विश्वविद्यालय से प्रबंधन में स्नातक, आईआईएम(सी) में शिक्षण के बाद भारतीय पुलिस सेवा में आई भारती घोष ने 27 डिसंबर 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पश्चिम मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक पद से हटाए जाने से नाराज हो कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी रही घोष ने यह कदम उठाया था। सत्ता में आने पर ममता बनर्जी ने करीब दस साल तक कोसोवो और बोसनिया में यूएन शान्ति सेना में तैनात रहीं व 2011 में बंगाल लौटीं घोष को झाडग़्राम का एसपी बनाया गया था। सरकार ने तत्काल उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया। उसके बाद मुख्यमंत्री और घोष के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी। राज्य पुलिस ने पुरानी और नई शिकायतों के आधार पर घोष के खिलाफ रंगदारी वसूली का मामला दर्ज कर गिरफ्तार करने के लिए उनकी तलाश शुरु कर दी। इसके बाद से वे भूमिगत हो गईं और बीच-बीच में अज्ञात जगह से अपना वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ बयान देती रही हैं। हालही में उन्होंने गुप्त ठिकाने पर एक समाचार चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने मुख्यमंत्री पर सबंग विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस को जितवाने के लिए निर्देश दिए जाने का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि सबंग विधानसभा उपचुनाव में भाजपा का वोट बढऩे के कारण उन्हें पश्चिम मिदनपुरा के एसपी से हटाया गया था।

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