मिसाल : हिन्दू नौजवानों ने मुस्लिम वृद्ध को खून देकर बचाई जान

- ओ पॉजीटिव था 70 वर्षीय वृद्ध का ब्लड ग्रुप

By: Rajendra Vyas

Published: 24 Dec 2020, 07:17 PM IST

हावड़ा. दो हिन्दू नौजवानों ने मानवता का परिचय देते हुए मुस्लिम वृद्ध को खून देकर उसकी जान बचाई। मस्जिद में रहनेवाले एक वृद्ध व्यक्ति अस्वस्थ होकर अस्पताल में भर्ती था। उसे खून की जरूरत थी। इस बात की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता ने फेसबुक पर पोस्ट किया। उस पोस्ट को देखकर दो हिंदू युवकों ने उक्त व्यक्ति को खून देकर उसकी जान बचाकर मिशाल कायम की। इनमें उलूबेडिय़ा के श्यामपुर निवासी रॉबिन व कटालघाटा के निवासी और जूट मिल के मजदूर मिथुन ने उलूबेडिय़ा अस्पताल के ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान किया। इसकी वजह से 70 साल शेख अनवर अली की जान बची। पूरे परिवार ने रॉबिन व मिथुन के प्रति आभार जताया।
बताया जाता है उलूबेडिय़ा पारिजात मस्जिद के 70 साल शेख अनवर अली को उलूबेडिय़ा के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच की कि अनवर के रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने के कारण रक्त की आवश्यकता बताई। अनवर का ब्लड ग्रुप ओ पॉजीटिव है। जब उनके परिवार के सदस्य रक्त के नमूने लेकर उलूबेडिय़ा ब्लड बैंक गए वहां रक्त नहीं था। ब्लड बैंक की ओर से कहा गया कि रक्तदाता लाने पर ही रक्त मिलेगा। यह सुनने के बाद परिवार के लोग घबरा गए। डॉक्टरों ने बताया कि अनवर को दो यूनिट रक्त की जरूरत थी।
अनवर के रिश्तेदारों ने पांचला के सामाजिक कार्यकर्ता रेजुल करीम से संपर्क किया। वह थैलेसीमिया के कई रोगियों के लिए रक्तदान की व्यवस्था प्रत्येक माह करता है। रेजुल ने इस संबंध सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। सोमवार को वह पोस्ट शामपुर 2 ब्लॉक के एक कर्मचारी रॉबिन के ध्यान में आया।
रॉबिन ने कहा कि उस पोस्ट को देखने के बाद उनसे जल्द संपर्क किया। उलूबेरिया ब्लड बैंक जाकर रक्तदान किया। बिना कुछ सोचे समझे मैं खून देने को तैयार हो गया। खून के लिए एक की जान चली जाएगी, इसे देखा नहीं जाएगा। इसलिए मैं खून देने के लिए गया। अनवर ने कहा कि अलग धर्म के नौजवानों ने मुझे खून देकर बचाया। इससे बड़ा धर्म क्या हो सकता है। उलूबेडिय़ा अस्पताल के अधीक्षक सुदीपरंजन काडार ने कहा राज्य में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से खून की कमी हो गई है। रक्तदान शिविर की संख्या में कमी आई है। कोरोना स्थिति में रक्तदान शिविर कई दिनों तक बंद रहा।

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