बचपन में ही सिर से उठ गया था पिता का साया, हारी नहीं हिम्मत आज हैं कंपनी के सीईओ,

WEST BENGAL NEWS: The father's shadow was raised from his head in childhood, he did not lose courage.प्रवासी युवा राजस्थानी उद्यमी अमित शर्मा की जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि बन गए कंपनी के सीईओ, 2 पूर्व राष्ट्रपति कर चुके हैं उनके कार्य की प्रशंसा, 2024 तक 1 लाख से अधिक युवाओं को राजगार दिलाने में सहयोग है लक्ष्य

 

कोलकाता. महज 13 साल की उम्र में ही 1987 में सिर से पिता पं. ओमप्रकाश पुजारी का साया उठ गया। बड़े भाई विजय शर्मा ने पितातुल्य आशीर्वाद से आगे बढ़ाया। पिता के निधन के बाद बड़े भ्राता के सहयोग के बावजूद संघर्ष करना पड़ा पर कभी भी हिम्मत नहीं हारी। आज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन क्षेत्र में अपनी बिजनेस सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन्स कंपनी डायनाविजन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ-सह-प्रबंध निदेशक हैं। जी हां, यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं और न ही किसी टीवी सीरियल की कहानी, बल्कि प्रवासी युवा राजस्थानी उद्यमी अमित शर्मा की जीवन के जद्दोजहद के बाद सफलता की सच्ची घटना है। आज वे किसी परिचय के मोहताज नहीं। मूल रूप से राजस्थान के झुन्झुनूं जिले के गुढ़ागौडज़ी के निवासी अमित ने राजस्थान पत्रिका के संवाददाता शिशिर शरण राही से कोलकाता स्थित अपने ऑफिस में गत दिनों खास बातचीत में अपनी जीवन की कहानी बयां की। 1973 में कोलकाता में जन्मे अमित की प्राथमिक शिक्षा हिन्दी माध्यम माहेश्वरी विद्यालय से हुई। 1985 में भवीनापुर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एमबीए किया। कॉलेज में दाखिला लेने पर अंग्रेजी बेहतर नहीं होने से उन्हें संघर्ष करना पड़ा। इसी दौर ने जीवन को नई दिशा दी और आगे बढ़े। उन्होंने बताया कि तब वे परिवार के प्रथम ग्रेजुएट थे। 21 साल की उम्र में ही वे दधीचि परिसर कोलकाता के सचिव बने। कम उम्र में ही उन्होंने कई संगठनों के साथ कलकत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स, बीएनआई, विप्र फाउंडेशन, राजस्थान ब्राह्मण संघ, लॉयंस क्लब ऑफ कलकत्ता एलीट आदि संस्थाओं में सक्रिय रहे। 4 साल से इंटाली क्षेत्र स्थित गांधी विद्यालय के मेंन्टर एवं सलाहकार हैं।

अनेक पुरस्कारों से सम्मानित
डायनाविजन ग्रुप के संस्थापक और प्रबंध निदेशक के रूप में आज अमित शर्मा का महानगर के सफल उद्यमियों में स्थान है। वे २०१६ में पूर्व राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपजीजे अब्दुल कलाम व प्रणव मुखर्जी भी उनके कार्य की प्रशंसा कर चुके हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल कैम्पेन चलाया। वे शी-प्रेन्योर कार्यक्रम के माध्यम से अविकसित समाज की बालिकाओं को शिखर पर पहुंचाने में जुटे हैं। २०२५ तक ५०० बालिकाओं को भी करदाता बनाना उनका लक्ष्य है। टेली के पूर्वी भारत के तकनीक ग्रुप से जुड़े डिजिटल इंडिया की तरफ कंपनी की राह मोड़ दी। बेरोजगारों का दर्द समझकर वे उन्हें राजगार दिलाने में लगे हुए हैं। आज कोलकाता, और सिलीगुड़ी में इनके प्रतिष्ठान में 118 कर्मचारी हैं। अब तक 7886 युवाओं को सहयोग कर कई प्रतिष्ठानों में नौकरी दिला चुके हैं। उनका लक्ष्य २०२४ तक 1 लाख से अधिक युवाओं को राजगार दिलाने में पूर्ण सहयोग करना है।

इसलिए हैं खास?
एक सफल व्यवसायी होने के साथ अमित दूरदर्शी, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को तरजीह देने वाले हैं। पूर्वी भारत के सबसे बड़े आईटी मेला कम्पास आईटी फेयर के संयोजक रहे। आईड्रीम नामक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए नॉलेज एम्पावरमेंट एंड ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया। कलकत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स समेत कई कमेटियों के चेयरमैन रहे। २०१८ में बेस्ट जोनल पर्सन, २०१९ में लॉयन्स इंटरनेशनल प्रेसीडेंट मेडस मिला। विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। लॉयंस क्लब इंटरनेशनल की ओर से 2016-17 का पुरस्कार। वर्तमान में लॉयन्स क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट322बी1 के जोन चेयरमैन, इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्री के पूर्वी भारत क्षेत्रीय परिषद ईआईआरसी सदस्य, बीएनआई के सीनियर डायरेक्टर कन्सलटेन्ट व बिजनेस एंड बियोन समिट चेयरमैन हैं।

Shishir Sharan Rahi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned