अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मेट्रो के नए रैक का फस्र्ट लुक जारी

सॉल्टलेक कारशेड में दिखाया गया मेट्रो का नया रैक
-अक्टूबर से शुरू होगी सेक्टर-5 मेट्रो सेवा

कोलकाता

By: Krishna Das Parth

Published: 25 Apr 2018, 10:47 PM IST

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के सेक्टर-5 और युवाभारती क्रीड़ांगन के बीच चलने वाली मेट्रो के शानदार अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए रैक का फस्र्ट लुक बुधवार को सॉल्टलेक कारशेड में जारी किया गया। यह नया रैक शनिवार को बेंगलूरु से कोलकाता पहुंचा है। बुधवार को मेट्रो प्रबंधन के सदस्यों ने इसकी खासियत के बारे में संवाददाताओं को बताया। मेट्रो के नए रैक में विस्तृत जगह, सीसीटीवी, टॉक बैग सिस्टम, स्वचालित प्रणाली सहित कई सुविधाएं हैं।

7 दिनों में और एक रैक

ईस्ट वेस्ट मेट्रो रेल सूत्रों ने बताया कि अगले ७ दिनों में एक और रैक कोलकाता पहुंचेगा। इस माह के अंतिम सप्ताह में दोनों रैकों का ट्रायल रन शुरू होगा। कोलकाता मेट्रो रेल निगम (केएमआरसी) के सूत्रों ने बताया कि इस महीने के अंत से ट्रायल शुरू होंगे। यह ट्रायल लगभग ३ महीने तक चलेंगे। उसके बाद ही रिसर्च डिजायन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाईजेशन व कमीश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी से मेट्रो संचालन के लिए अनापत्ति पत्र (एनओसी) मिलेगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर से यह मेट्रो सेवा चालू हो जाएगी।

कम झटके व 80 किमी की रफ्तार

ईस्ट वेस्ट मेट्रो कै नए रैक के संचालन में कम झटके लगेंगे। पहले लीवर से संचालन में टे्रन रोकने पर ज्यादा जोर से झटके लगते थे। ऐसे में यात्री अपना नियंत्रण खो देते थे। इसकी रफ्तार 80 किलो मीटर प्रतिघंटा होगी। स्वचालित होने से झटके न के बराबर होंगे। लगभग ८० किमी की रफ्तार से हावड़ा मैदान से करूणामयी तक जाने में कुल ३२ मिनट का समय लगेगा।

बेहतर व चौड़े कोच

ईस्ट वेस्ट मेट्रो के नए रैक पहले की तुलना में काफी चौड़े हैं। यह कोलकाता मेट्रो के कोच से बेहतर हैं। अधिक चौड़े होने से सुविधा होगी। ईस्ट वेस्ट मेट्रो के लिए इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक रैक पूरी तरह स्टेनलेस स्टील के बने हैं। इस रैक में 2,068 यात्री यात्रा कर सकते हैं।

सीसीटीवी कैमरे

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मेट्रो रैक के प्रत्येक कोच में 4 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन कैमरों से कन्ट्रोल रूम ंमें मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके साथ ही मेट्रो रैक में अगर कोई शिकायत आती है तो सीधे कार्रवाई की जा सकेगी।

टॉक-बैग प्राणाली

नए इस रैक के हर कोच में टॉक-बैग प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इस टॉक बैग के जरिए यात्री सार्वजनिक रूप से चालक से बात क र सकेंगे। यात्रियों के बीच संचार के लिए एक रेडियो होगा।

स्वचालित प्रणाली
नया रैक में चालक की न्यूनतम भूमिका होगी। यह स्वचालित रैक हैं। एक बार जब वह स्टार्ट बटन दबाता है, तो एक स्वचालित प्रबंधन प्रणाली खत्म हो जाएगी। दरवाजे, एयर कंडीशनिंग, ब्रेक, बिजली की आपूर्ति को भी नियंत्रित करने के लिए सुविधा है।

लीवर से बटन

नए इस रैक में टे्रन का संचालन लीवर नहीं बल्कि बटन से होगा। कोलकाता मेट्रो की नोआपाड़ा और कवि सुभाष स्टेशनों के बीच चलने वाले रैक को लीवर के साथ संचालित किया जाता हैं। ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के लिए निर्मित रैक में तकनीक पूरी तरह स्वचालित है। यहां विशेष दो बटन है- एक ट्रेन चालू करने के लिए और द्वार बंद करने के लिए, दूसरा अन्य सुविधाओं के लिए।

यातायात नियंत्रण

ईस्ट वेस्ट मेट्रो में एक ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर होगा जो ट्रेनों के संचालन को सुचारू बनाने के लिए काम करेगा। यह केंद्र हवाई अड्डे के एटीसी टावर की तरह काम करेगा

सिग्नलिंग सिस्टम

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो में संचार-आधारित ट्रेन नियंत्रण और एक सिग्नलिंग सिस्टम है। इसमें ट्रेनों को ढाई मिनट तक बढ़ाने के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसमेंं सिग्नल पोस्ट या फिक्स्ड ब्लॉकों वाला स्वचालित सिस्टम है। टे्रन संचालन के समय यदि आगे ट्रैक अवरुद्ध है, तो ट्रेन स्वचालित रूप से बंद हो जाएगी। इसमें एक आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम है जो किसी कारण से चालक अक्षम होने पर स्वयं काम करेगी।

मोबाईल चार्जिंग प्लग

नए रैक में मोबाईल चार्ज करने क लिए प्लग लगे होंगे। यह प्लग दो कोच के बीच में बनाएं गए हैं। मालूम हो कि कोलकाता मेट्रो के रैक में यह सुविधा नहीं थी इसके साथ ही व्हील चेयर वाले यात्रियों के लिए विशेष सुविधा है। व्हील चेयर वालों के लिए जगह चिन्हित की गई है।

(कासं)

Krishna Das Parth Desk
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