पहले खुद के पड़े लाले, अब चला रहे हजारों की जीविका

शख्सियत: बनवारी लाल सोती-फर्श से अर्श तक का सफर, मरूभूमि का महासागर, कौस्तुभ जयन्ती महोत्सव 5 को, 101 संस्थाएं करेंगी सम्मान, जीवन ग्रंथ १९वां अध्याय का होगा लोकार्पण

By: Shishir Sharan Rahi

Updated: 03 Jan 2020, 04:22 PM IST

कोलकाता. जन्म के महज 6 साल की आयु से ही संघर्ष के साए में जिंदगी बिताने वाले प्रवासी राजस्थानी बनवारीलाल सोती ने पहले छोटी सी नौकरी की और अब वे हजारों लोगों की जीविकोपार्जन का जरिया बन गए हैं। लेकिन सोती का यह सफर इतना आसान नहीं रहा। बल्कि विपरीत हालात में उन्हें खुद का ही रास्ता तैयार करना पड़ा। आज मशहूर शायर इकबाल की शायरी की ये पंक्तियां राजस्थान के चूरू जिले के मूल प्रवासी राजस्थानी उद्योगपति-समाजसेवी बनवारीलाल सोती पर सौ फीसदी चरितार्थ लागू होती है- ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से पूछे, बता तेरी रजा क्या है?’ राष्ट्र और समाज को समर्पित ब्राह्मण समाज के वैश्विक संगठन विप्र फाउण्डेशन के अंतरराष्ट्रीय समन्वयक सुशील ओझा ने गुरुवार शाम पत्रिका से खास बातचीत में सोती की जिंदगी से जद्दोजहद कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में 6 नवम्बर 1947 को जन्मे सोती की कौस्तुभ जयन्ती महोत्सव के अवसर पर उनके जीवन की कर्ममय जीवन यात्रा पर आधारित कार्यक्रम 5 जनवरी को कोलकाता के विद्यामंदिर प्रेक्षागृह में आयोजित होगा। इसमें महानगर की 101 संस्थाएं उनका सम्मान करेंगी जबकि इस प्लैटिनम जुबली समारोह में उनके जीवन ग्रंथ ‘१९वां अध्याय का लोकार्पण भी किया जाएगा’। इस अवसर पर कोलकाता की 100 से ज्यादा संस्थाएं सोती का नागरिक अभिनन्दन करेंगी। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वजों ने जो समरसता की नींव रखी उसे हम और सशक्त बनाते हुए नवीन भारत के निर्माण में सहयोगी बनेंगे, जिसके तहत विप्र फाउंडेशन, उन्नत समाज व समर्थ राष्ट्र की दिशा में सक्रिय रूप से कार्यरत है।

दोनों हाथों से खुलकर दान
कहते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता, लेकिन वह सूर्य की तीक्ष्ण किरणों से तप्त होकर भी पूरे ब्रहमांड में शीतलता चांदनी बिखेरता है। कुछ ऐसा ही व्यक्तित्व सोती का है। मशहूर लोककवि अब्दुल रहीमखानखाना की इन पंक्तियों- ‘पानी बढ़े नाव में, घर में बढ़े दाम। दोनों हाथ उलिचिएय, यही सयानो काम’। को जीवन में लागू करते हुए सोती ने दोनों हाथों से खुलकर कई संस्थाओं के प्रखल्पों में अहम योगदान दिया। शिक्षा-स्वास्थ्य और गोसेवा ये 3 अहम सूत्रों को खुद के जीवन का ध्येय बनाया। वैसे तो कई है लेकिन मुख्य रूप से 2 चेरिटेबल ट्रस्टों की स्थापना की जिसमें एसोसिएटेड चेरिटेबल ट्रस्ट और सोती चेरीटेबल ट्रस्ट मुख्य है। ये दोनों ही संस्थाएं मानव सेवा के प्रति समर्पित हैं। सोती की शिक्षा क्षेत्र में खास रूप से रुचि है। केसरदेवी उच्च माध्यमिक विद्यालय चूरू के विशाल भवन का निर्माण कर उसका संचालन आदर्श विद्या मंदिर संस्थान के हवाले कर दिया। इसी तरह चूरू चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बालिका विद्यालय जहां पीजी लेवल तक की शिक्षा दी जाती है। इनके माध्यम से फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी अंतर्गत 50 एकल स्कूल वनवासी क्षेत्र में पिछले 20 साल से चल रहे हैं। चाहे चूरू पिंजरापोल हो या कोलकाता की पिंजरापोल गोशाला, सोती के सेवा कार्यों से हमेशा लाभान्वित रही है। इनके ट्रस्ट की ओर से अक्सर चिकित्सा शिविरों में हजारों की तादाद में लाभार्थी होते हैं। कुओं का जीर्णोद्धार, पेयजल व्यवस्था, मंदिर, प्रतीक्षालय, धर्मशाला, निर्धन मेधावी छात्रों को अनुदान सहित अनेक मानव सेवा कार्यों का संचालन इनके मार्गदर्शन में हो रहा है।इन पर राजस्थानी कहावत पूरी तरह लागू चरितार्थ होती है-दान करे तो ऐसे करें कि एक हाथ से दिया दान दूसरे हाथ को ज्ञात न हो। निष्ठा, कर्मठता, परिश्रम, विनम्र दानशीलता और अनुशासित जीवन ही इनका मूल मंत्र है। डॉ. शिवओम अंबर की ये लाइन सोती के जीवन को पूर्णतया व्याख्याचित करती है- ‘लफ्जों में चिंगारी रख, लहजे में खुद्दारी रख।
सबके सुख में शामिल हो, दुख में साझेदारी रख।
दरबारों से दूरी रख, फुटपाथों से यारी रख।
श्रीमद्भागवत गीता पढ़, युद्ध निरंतर जारी रख’।

वर्तमान में विप्र फाउंडेशन के संरक्षक
वर्तमान में विप्र फाउंडेशन के संरक्षक, विशुद्धानंद अस्पताल के अध्यक्ष
समाजसेवी, उद्योगपति, मानवता प्रेमी, गोभक्त सोती आज कोलकाता के अनेक सामाजिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हैं। वर्तमान में विप्र फाउंडेशन के संरक्षक सोती महानगर के विशुद्धानंद अस्पताल के अध्यक्ष भी हैं। विशुद्धानंद हॉस्पिटल सहित मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी, मारवाड़ी अस्पताल, मातृ मंगल प्रतिष्ठान सहित दर्जनों संस्थानों को दान दे चुके हैं। इसके अलावा देश की अनेक गोशालाओं में गोवंश के संरक्षण-संवद्र्धन आदि पर भी काम किया है।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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