भारत की संस्कृित का ही किया पालन - कोरोना योद्धा गोपाल दास


- हम नहीं करेंगे तो और कौन करेगा

By: Vanita Jharkhandi

Updated: 16 Dec 2020, 09:15 PM IST


कोलकाता
मार्च माह से कोरोना ने सभी को अकेला कर दिया। खासकर के उन घरों में जहां पर वरिष्ठ लोग रह रहे है। लोग उनका काम करना तो दूर उनके पास तक जाना छोड़ रहे थे वैसे में कोरोना योद्धा लगातार मदद के लिए आए भले ही उनको विरोध का सामना करना पड़ा।
सरकार लेन के रहने वाले गोपाल दास का जिक्र करना जरूरी है क्योंकि उन्होंने आर्थिक संकट व बीमारी के बावजूद कोरोना काल में लोगों की भरसक मदद की और खुद व उसकी परिवार के लोग भी कोरोना से पीड़ित हुए। गोपाल दास का कहना है कि हम नहीं आगे आएंगे तो कौन करेगा। भारत का हूं और उसकी संस्कृति का ही पालन कर रहा हूं। इसमें कोई खास बात नहीं है।
गोपाल के लिए यह साल उनके लिए काफी जटिल रहा। वह पहले से ही टीबी की बीमारी से पीड़ित थे। उनको घर में आराम रहते हुए अच्छे से खाने -पीने का चिकित्सक ने सलाह दी थी। ऐसे में वह बैंक में रखे पैसों को ही खर्च कर रहा था। जैसे ही थोड़ा स्वस्थ हुआ कोरना महामारी ने पूरे मुहल्ले में फैलने लगा।
सताने लगी बुजुर्गों की चिन्ता
ऐसे में उसकी चिन्ता उन बुजुर्गों की चिन्ता सता रही थी जो घर में अकेले रहे है। ऐसे ही सरकार लेन के एक मकान में तीन लोग रहे है जिनमें एक की उम्र 80 पार थी बाकी के लोग 60 पार थे। ऐसे में वह उनके घर पहुंच कर आप लोग घर से बाहर न जाए हम आपको जो लगेगा सब घर पहुंचा देंगे। इसके बाद से वह लगातार उनका सामान लाता रहा। इस बीच उसी घर में दोनों लोग कोरोना पोजीटिव हो गए। इसके बाद से गोपाल के लिए संकट बढ़ गया। उनके घर में काम करने वाले हट गए। गोपाल अब अपनी पत्नी काजल दास के साथ मिलकर लगातार खाना पहुंचाने का भी काम करने लगा। इसके कारण पूरे मुहल्ले वालों ने उसे घेर लिया और उसे वहा से निकल जाने को कहा। उसे मुहल्ले में कोरोना फैलाने का इल्जाम लगाकर निकल जाने को कहा। इसके बाद भी गोपाल नहीं थमा। वह अभी तक उसे घर के बुजुर्गों के लिए खाना पहुंचा रहा है।
उधार लेकर की मदद
गोपाल का खुद के इलाज में ही बैंक बैलेंस खत्म हो चुका था। ऐसे में उसने अपने ही एक बुजुर्ग रिश्तेदार जो हावड़ा के बोटेनिकल गार्डन में अकेले ही रहती थी। उसकी दयनीय स्थिति को देखते हुए 5 हजार रुपए उधार लेकर उसके घर राशन पहुंचाया।

मेरे घर से भी अधिक चावल उसके घर में
गोपाल ने इस दौरान कई कार्यों के अपने अनुभव शेयर किए। उसने बताया कि तारकप्रामाणिक एक आर्थिक रूप से कमजोर घर में खाना पहुंचाने में के लिए सामान आदि लेकर उसके घर पहुंचा तो देखकर हैरान था क्योंकि उसके घर में मेरे घर से भी बहुत अधिक चावल था। उसने हर जगह से बांटने वालों से चावल लेकर जमा कर लिया था। ऐसे में वह लौट भी नहीं सकता था उसने उसे सामानों से भरा थैला उसे थमा दिया।

पत्नी ने किया पूरा सहयोग
गोपाल ने कहा कि इस भयावह स्थिति में मेरे हर कार्य को पत्नी काजल का सहयोग रहा। वह अब तक लोगों को खाना बना कर दे रही है जहां पर कोरोना के कारण से नौकरों ने काम करना बन्द कर दिया था। उसे चिन्ता तो थी ही। कुछ समय के बाद घर के तीन सदस्य कोरोना पीड़ित हुए और गोपाल भी उनमें से एक था। बस उस कुछ दिन थमा रहा पर निरन्तर अब तक वह सेवा कार्य में जुटा है।

Vanita Jharkhandi Reporting
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