बंगाल में अग्रिम पंक्ति के योद्धा जूझ रहे कई मोर्चों पर

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सा कर्मी कोरोना पॉजेटिव रोगियों के संपर्क में आकर संक्रमित हो रहे हैं या उनके संक्रमण की आशंका बढ़ रही है। जिस वजह से उन्हें क्वारंटाइन किया जा रहा है। इस कारण महामारी से महायुद्ध के अग्रिम पंक्ति योद्धाओं को राज्य में कई मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है।

By: Paritosh Dube

Published: 18 Apr 2020, 12:56 PM IST


केस- 1 - हावड़ा जनरल अस्पताल में मार्च के अंतिम सप्ताह 48 वर्षीय महिला की अस्पताल के महिला वार्ड में मौत हो गई। उसके जांच नतीजे कोरोना पॉजेटिव आए। सरकार ने अस्पताल बंद करने की घोषणा की। अस्पताल अधीक्षक समेत दो डॉक्टर, एक सफाई कर्मी भी कोरोना पॉजेटिव निकले। बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मियों को क्वारंटाइन में भेजना पड़ा।
केस- 2- एनआरएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीज की मौत हुई। उसके जांच नतीजे कोरोना पॉजेटिव निकले। यहां भी बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स और रोगियों को क्वारंटाइन में भेजना पड़ा।

केस- 3- 11 अप्रेल को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के मेल और कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती तीन रोगी कोरोना पॉजेटिव निकले। उनमें से दो की मृत्यु हो गई। दोनों वार्डों के के एक हिस्से को बंद करना पड़ा। चिकित्साकर्मियों को क्वारंटाइन करना पड़ा।

केस- 4- 12 अप्रेल को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के ईडन परिसर में बच्चा जनने के बाद प्रसूति कोरोना पॉजेटिव पाई गई। वहां तैनात चिकित्साकर्मियो ंको क्वारंटाइन करना पड़ा। ईडन परिसर व सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग को बंद करना पड़ा।


कोलकाता. राज्य में कोरोना से भिड़ रहे अग्रिम पंक्ति के नायक चिकित्साकर्मियों पर नया संकट आन खड़ा हुआ है। एक के बाद एक बड़े अस्पतालों के कई सामान्य वार्डों में कोरोना संक्रमित रोगियों की चिकित्सा से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। चिकित्साकर्मियों के संक्रमित होने की पुष्टि हो रही है। अस्पतालों के वार्ड बंद किए जा रहे हैं। पत्रिका की पड़ताल में पखवाड़े भर में ऐसे आधे दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें कोरोना संक्रमित रोगियों का इलाज सामान्य वार्डों में किया गया। जिसके कारण संक्रमण फैला। इस स्थिति में राज्य के चिकित्साकर्मियों का संगठन भी मुखर हो रहा है। संगठन ने केन्द्र और राज्य सरकार से चिकित्साकर्मियों को पीपीई मुहैया कराने और कोरोना के परीक्षणों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक एक कोरोना पॉजेटिव मरीज के पीछे छह चिकित्साकर्मियों की जरूरत होती है। इसलिए सरकार को कोविद- 19 संदिग्धों और और सामान्य मरीजों की अलग अलग जगह में चिकित्सा करने के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना होगा। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट मुहैया कराने होंगे। चिकित्सकों को भी सतर्क रहना होगा।।
तीन सौ से ज्यादा चिकित्साकर्मी क्वारंटाइन में
कोरोना पॉजेटिव मरीजों के संपर्क में आए राज्य के आधा दर्जन से ज्यादा अस्पतालों के तीन सौ से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी आए हैं। जिनमें डॉक्टर, नर्स शामिल हैं। जिन्हें क्वारंटाइन या सेल्फ आइसोलेन में रखा गया है। उनमें से कुछ के कोरोना पॉजेटिव होने की पुष्टि हो चुकी है।
सतर्क हुआ प्रशासन
राज्य सरकार ने भी स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमण की आशंका को देखते हुए नया चिकित्सा प्रोटोकॉल जारी किया है। सूत्रों के अनुसार अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अलग स्थान बनाना होगा। ऐसे मरीजों की जांच सुरक्षा के तय मानकों को अपनाकर ही की जाएगी। इसका मकसद संदिग्ध मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग करना है।
इनका कहना है
कोरोना के खिलाफ जंग में हम अपने अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को नहीं खो सकते। जंग जीतने के लिए योद्धाओं को हथियार याने सुरक्षा किट मुहैया कराई जाए। ज्यादा से ज्यादा परीक्षण किए जाएं। संदिग्धों को अलग रखा जाए।
डॉ. अर्जुन दासगुप्ता- अध्यक्ष पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम

अस्पताल में आने वाले संदिग्ध रोगियों से दूरी बनाई जा रही है। लक्षण पाए जाने पर सुरक्षा प्रोटोकॉल मानकर तय अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। पीपीई या अन्य सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं।
डॉ. जयव्रती मुखर्जी- अधीक्षक बरानगर स्टेट जनरल अस्पताल

राज्य सरकार शुरुआत से ही आरोप प्रत्यारोप में लगी हुई है। परीक्षण बढ़ाए जाने, आंकड़े सार्वजनिक करने की जरूरत है। इस स्थिति में चिकित्साकर्मियों में संक्रमण बढ़ा तो पछताना पड़ेगा।
डॉ. सुभाष सरकार, स्त्री रोग विशेषज्ञ व सांसद बांकुड़ा

राज्य में प्रोटोकॉल मानकर चिकित्सा की जा रही है। कोरोना से जंग में सभी तरह की ऐहितायात बरती जा रही है।
डॉ. शांतनु सेन, पूर्व अध्यक्ष आईएमए,
इस गति से बढ़े परीक्षण
राज्य सरकार की ओर से कोविद- 19 के परीक्षण शुरुआती महीने में धीमे रहे। राज्य में 12 फरवरी से कोविद- 19 के बुलेटिन जारी करने शुरू किए गए। मार्च के अंत तक भी परीक्षण की संख्या धीरे धीरे बढ़ी। लॉकडाउन के दूसरे हफ्ते के बाद परीक्षणों की संख्या में इजाफा हुआ। पिछले दस दिनों में परीक्षणों की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी की गई है।
अवधि परीक्षणों की संख्या कुल
29 फरवरी तक - 25
23 मार्च तक - 172
04 अप्रेल तक - 1042
१7 अप्रेल तक - 4212
(स्त्रोत- पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग कोविद- 19 बुलेटिन)

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