गंगा दशहरा पर 1100 दीपों से गंगा आरती

गंगा आरती सेवा का आयोजन

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 24 May 2018, 10:07 PM IST

कोलकाता. गंगा आरती सेवा के तत्वावधान में गुरुवार को गंगा दशहरा महोत्सव का आयोजन किया गया। 1100 दीपों से गंगा की आरती के साथ हुए इस आयोजन में कोलकाता, हावड़ा और आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु शामिल हुए। मल्लिक घाट पंपिंग स्टेशन के समीप छोटे लाल दुर्गा प्रसाद घाट (फूलघाट) में आयोजित इस कार्यक्रम में काफ़ी तादाद में श्रद्धालु शामिल हुए। गंगा सेवा समिति के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन गणपति वंदना से हुआ। भजन गायक-कलाकारों ने गंगा की महिमा पर भजन पेश कर भाव-विभोर कर दिया। विधायक स्मिता बक्सी, अध्यक्ष पं. लक्ष्मीकातं तिवारी, उपाध्यक्ष स्वपन बर्मन सहित अन्य ने विप्रजनों के सान्निध्य में विधिपूर्वक गंगा का पूजन किया। जोड़ों ने मनोकामना आरती में हिस्सा लिया, तो वहीं दूरदराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी आरती के में भागीदारी निभाई। आयोजन कमेटी के पदाधिकारी शंकर मूंधड़ा, अशोक कुमार अग्रवाल, जसकरण राठी, गणेश ओझा, दीपक राठी, मनीष मोहता, विक्रम अग्रवाल आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।
--‘पुनि दर्शन दिय, पुन मति गंगे....’
गंगा के अनन्य भक्त कविपती विद्यापति ने प्राण त्यागने के पहले गंगा को आह्वान किया और उन्हें गंगा दर्शन का पुण्य प्राप्त हुआ। गंगा दशहरा पर मिथिला विकास परिषद की ओर से आयोजित विद्यापति और गंगा विषय पर आयोजित परिचर्चा में मिथिला विकास परिषद अध्यक्ष अशोक झा ने यह बात कही। झा ने मृत्यु से पूर्व विद्यापति रचित--कल जोड़ी बिन मऊ तरल तरंगे, पुनि दर्शन दिय पुन मति गंगे....का उल्लेख कर लोगों को भाव विभोर कर दिया। संचालन मैथिली नाट्य मंच कलाकार गोपी कांत झा, मुन्ना-विनय कुमार प्रतिहस्त ने किया। विष्णु देव मिश्रा, रंजीत राय, कामेश्वर मंडल, रघुवीर यादव और मोती मंडल आदि उपस्थित थे।गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को दशहरा कहते हैं। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। स्कन्दपुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ला दशमी संवत्सरमुखी में स्नान और दान किसी भी नदी पर जाकर करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है। यदि ज्येष्ठ शुक्ला दशमी के दिन मंगलवार रहता हो व हस्त नक्षत्र युता तिथि हो यह सब पापों के हरने वाली होती है। वराह पुराण में लिखा है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी वह दस पापों को नष्ट करती है। इस कारण उस तिथि को दशहरा कहते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार जो मनुष्य इस दशहरा के दिन गंगा के पानी में खड़ा होकर दस बार इस स्तोत्र को पढ़ता है चाहे वो दरिद्र हो, चाहे असमर्थ हो वह भी गंगा की पूजा कर उस फल को पाता है।

 

Shishir Sharan Rahi Reporting
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