चीन की दोतरफा घेरेबंदी में सहायक होगा बंगाल का हासीमारा एयरबेस

तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 364 किमी की दूरी पर स्थित हासीमारा एयरबेस में राफेल का दूसरा बैच तैनात होगा। इससे भारतीय वायुसेना की स्ट्राइकिंग क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि होनी तय है।

By: Paritosh Dube

Published: 19 Sep 2020, 10:56 AM IST

कोलकाता.
भारत की सीमा पर तनाव बढ़ाने की कोशिशों में लगे चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए वायुसेना ने उत्तर बंगाल के हासीमारा एयरबेस में राफेल फाइटर जेट के दूसरे बैच को तैनात करने की तैयारी को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हासीमारा से तिब्बत की राजधानी ल्हासा की दूरी 364 किमी है। वहीं एयरबेस से भूटान कुछ मीलों की दूरी पर है। जंग की हालत में भारत के पक्ष में उत्तर बंगाल में स्थित यह एयरबेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वायु सेनाके एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक जब हमारे पास राफेल नहीं था, तो हमने पूर्वी कमान में सुखोई के तीन स्क्वाड्रन तैनात किए थे। अब राफेल की तैनाती की बाद पूर्वी कमान में भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में तेजी से विस्तार होगा।
वायुसेना ने अम्बाला और हासीमारा में राफेल की तैनातगी के लिए जरूरी अधोसंरचना के निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।
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1962 युद्ध के बाद तैयार हुआ एयर बेस
हासीमारा बेस 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद बाद बनाया गया था। पहले यहां मिग -27 स्क्वाड्रन तैनात किया गया था। अब अत्याधुनिक राफेल तैनात किया जा रहा है।
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चिकन नेक की सुरक्षा जिम्मेदारी है हासीमारा पर
हासीमारा एयरबेस पर उत्तर बंगाल में स्थित संकरे गलियारे चिकन नेक की रखवाली की महती जिम्मेदारी है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर के नाम से जाने जाने वाले 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि का यह गलियारा मुख्यभूमि के भारत को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ता है। इसके अलावा यह एयरबेस सिक्किम के नाथुला दर्रे की सुरक्षा का दायित्व भी पालन करता है।
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एलएसी से सबसे करीब है एयरबेस
वायुसेना के पूर्व अधिकारियो ंके मुताबिक हासीमारा एयरबेस चीन से लगी सीमा पर सबसे फारवर्ड भारतीय एयरबेस है। यहां से मिनटों में चीन की सीमा है। राफेल जैसा दमदार विमान की तैनाती करने से पूरे क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की धमक और ताकत में अप्रत्याशित वृद्धि होने वाली है।
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जबरदस्त कैमोफ्लेग है बेस में
भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर (रिटायर्ड ) डीजे एस क्लेर ने बताया कि हासीमारा बेस में जबरदस्त कैमोफ्लेग की विशेषता है। यहां राफेल जैसे उन्नत युद्धक विमान की तैनाती से चीन की चिंता जरूर बढ़ेगी। हवा में हीं ईंधन भरने की क्षमता वाले युद्धक को चीन के सबसे करीब के भारतीय फारवर्ड बेस में तैनात करने से इस क्षेत्र में चीन की घेराबंदी आसान होगी।

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Paritosh Dube Desk
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