दीक्षित को 30वां डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान

दीक्षित को 30वां डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान

Shishir Sharan Rahi | Updated: 04 Jun 2019, 10:01:40 PM (IST) Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

कलामंदिर में 22 जून को राज्यपाल करेंगे सम्मानित

कोलकाता. महानगर की साहित्यिक-सामाजिक संस्था बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय प्रवर्तित डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान का 30वां सम्मान चिंतक-लेखक और उत्तरप्रदेश विधानसभाध्यक्ष ह्यदय नारायण दीक्षित को प्रदान किया जाएगा। कलामंदिर प्रेक्षागृह में 22 जून की शाम ५ बजे होने वाले विशेष समारोह में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, उत्तरप्रदेश के राज्यपाल रामनाईक की उपस्थिति में दीक्षित को यह सम्मान दिया जाएगा। सम्मान स्वरूप उन्हें 1 लाख नकद राशि, मानपत्र भेंट किया जाएगा। 18 मई 1946 को उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के लउवा ग्राम में दीक्षित का जन्म एक मध्यवर्गीय ब्रााहृण परिवार में हुआ था। पठन-पाठन के प्रति गहरी रुचि होने के कारण उन्होंने अभावों के बावजूद अर्थशास्त्र में एमए किया। बाल्यकाल से ही उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा। 1968 में भारतीय जनसंघ में सक्रिय होने से पहले संघ के क्षेत्रीय कार्यवाह का दायित्व निभाया और आपातकाल में 19 महीने जेल में रहे।

----1968 से राजनीतिक-सामाजिक जीवन में सक्रिय
1968 से राजनीतिक सामाजिक जीवन में निरन्तर सक्रिय दीक्षित किसान, युवा आन्दोलनों में प्रमुख भागीदारी के साथ अनुसूचित जातियों के उन्नयन के विशेष कार्य कर विशिष्ट पहचान बनाई। 1978 से 2004 तक काल चिन्तन पत्रिका का प्रकाशन/संपादन किया। विविध पत्र-पत्रिकाओं में 4 हजार से अधिक आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचित ग्रंथों की संख्या लगभग 30 है और उनके निबंधों में राष्ट्र, राष्ट्रीयता तथा भारत के सांस्कृतिक वैभव के विवेचन के साथ सामाजिक परिवर्तन-चिन्तन नजर आता है। वेदों की मीमांसा, गीता का सम्यक् विवेचन, अंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के प्रतिपादन के अलावा उनकी कृतियों में राम-शिव भी समाहित हैं। लगातार 4 बार उत्तरप्रदेश विधानसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित दीक्षित वर्तमान में उत्तरप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष होने केसाथ उत्तरप्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। 1990 में कुमारसभा प्रवर्तित डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान का पहला सम्मान संस्कृत के विद्वान-चिंतक डॉ. श्रीधर भास्कर वर्णेकर को और 2018 का सम्मान राष्ट्रवादी साहित्यकार तथा प्रेमचंद विशेषज्ञ डॉ. कमल किशोर गोयनका (नई दिल्ली) को प्रदान किया गया था।

 

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