‘भाषा मरती है, तो समाज मर जाता है’

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा

कोलकाता. जिस समाज में भाषा मरती है, वह समाज मर जाता है। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय कोलकाता केंद्र में हिंदी पखवाड़े के अवसर पर मीडिया की भाषा पर विशेष व्याख्यान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि जब हम मां के लिए मदर, पिता के लिए फादर, बहन के लिए सिस्टर बोलते हैं तो हिंदी के उन शब्दों की हत्या कर रहे होते हैं। जब कोई इस तरह से अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करता है तो वह हिंदी का शीलभंग करने का अपराधी है। राहुल ने सवालिया लहजे में कहा-क्या कोई अंग्रेजी अखबार या न्यूज चैनल रिपोर्टिंग करते हुए हिंदी के शब्दों का प्रयोग करता है? अगर नहीं तो फिर क्यों हिंदी के अखबार या न्यूज चैनल रिपोर्टिंग करते हुए अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करते हैं? हिंदी में शब्दों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सबको सचेत अवस्था में अपनी मातृभाषा का व्यवहार करने की आदत डालनी होगी। राकेश श्रीमाल ने स्वागत भाषण दिया। संचालन केंद्र के सहायक प्रोफेसर और संयोजक डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ और धन्यवाद ज्ञापित पूजा शुक्ला ने किया। केंद्र की तरफ से विजिटिंग फैकल्टी प्रो. अमरनाथ ने राहुल का सूत की माला पहनाकर और चरखा भेंटकर सम्मान किया। व्याख्यान के बाद राहुल ने पीएचडी शोधार्थियों संदीप दुबे, चांदनी कुमारी, सद्दाम हुसैन, नंदिनी सिन्हा तथा अन्य विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए।
----‘हिंदी देश की जातीय पहचान’
कोलकाता. देश का हर व्यक्ति हिंदी से किसी न किसी रूप में जुड़ा है और यही इस देश की जातीय पहचान है। जोगेशचंद्र चौधरी महाविद्यालय में गुरुवार को हिंदी दिवस पर वक्ताओं ने यह बात कही। आयोजन का मुख्य विषय भारतीयता की अवधारणा और हिंदी भाषा था। राजभाषा विभाग के सहायक निदेशक अनूप कुमार ने भारतीयता की अवधारणा और हिंदी भाषा पर विचार व्यक्त किए। मौके पर कॉलेज शिक्षक-छात्र उपस्थित थे। हिंदी विभाग की प्राध्यापक एकता हेला ने कहा कि यह देश भाषाओं का अजायबघर है, इसलिए आपसी वाक व्यवहार के लिए किसी एक माध्यम का होना अनिवार्य है जिसे सभी जानते हों। इस देश मे ऐसा कोई नहीं जो हिंदी न जानता हो, हिंदी गाने न सुनता हो, हिंदी फिल्में न देखता हो।

 

Shishir Sharan Rahi
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