बंगाल की लड़कियां कैसे पहुंच रही हैं गोवा के रेडलाईट एरिया

पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के साथ ही कोलकाता महानगर की लड़कियां घर क्यों अचानक गायब हो जा रही हैं और तीन-चार साल बाद वे गोवा में कैसे पहुंच जा रही हैं। वे कोलकाता से छुप कर बिना बताए क्यों गोवा जा रही हैं।

महज पांच हजार में एक कार्यालय में काम करने वाली दक्षिण कोलकाता की सपना अधिकारी एक दिन घर से काम पर निकली और फिर वापस नहीं लौटी, बाद वह गोवा में पाई गई

कोलकाता
पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के साथ ही कोलकाता महानगर की लड़कियां घर क्यों अचानक गायब हो जा रही हैं और तीन-चार साल बाद वे गोवा में कैसे पहुंच जा रही हैं। वे कोलकाता से छुप कर बिना बताए क्यों गोवा जा रही हैं।

दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज की 25 वर्षीय देवजान हलदर (बदला हुआ नाम) 19 साल की उम्र में एक दिन घर से काम पर निकली और फिर वापस नहीं लौटी। पांच साल बाद गोवा पुलिस ने उसे वहां के रेडलाईट एरिया से छुड़ाया।

उसने पुलिस को बताया कि एक पहचान के लडक़े ने उसे अच्छी नौकरी दिलाने के लिए मुम्बर्ई ले गया और वहां से गोवा ले जा कर उसे बेच दिया, जहां उसे कड़ी निगरानी में रखा गया और यातनाएं दे कर उसे देह व्यवपार करने के लिए उसे मजबूर किया गया।

महज पांच हजार में एक कार्यालय में काम करने वाली दक्षिण कोलकाता की सपना अधिकारी अच्छी नौकरी के लिए नया-नया दोस्त बने एक युवक से साथ मुम्बई गई। चार साल गोवा में देह व्यवपार के दलदल में रहने के बाद एक एनजीओ की मदद से पुलिस ने उसे दलदल से निकाल कर कोलकाता भिजवा दिया।

बशीरहाट की 15 साल की असीमा बीबी भी अपने घर दोस्तों के साथ ओकेस्टा पार्टी के साथ जाने का बहाना बना कर बेंगलुरू गई, जहां से वह गोवा में जा कर देह व्यवपार में फंस गई।

यही ही नहीं कोलकाता और बंगाल के दूसरे जिलों में सैकड़ों लड़किया हैं गरीबी से मुक्ति पाने के चक्कर में तस्करों के झांसे में आ कर जा रही हैं, जिनमें कोलकाता के गरबी घर की लड़कियां भी अधिक हैं। कोलकाता,उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया और मुर्शिदाबाद जिले के शहरी इलाके की लड़कियां भी तस्करों के चंगुल में फंस कर गोवा के अलावा मुम्बई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में इस नर्क में पहुंच जा रही है।

नबेल पुरस्कार विजेयता मलाला की आईडियल बसीहरहाट में लड़कियों की तस्करों से बचाने के लिए अभियान चला रही अनवरा खातुन ने कहा कि सिर्फ गोवा ही नहीं देश के दूसरे हिस्सों में भी बंगाल की लड़कियों की तस्करी हो धड़ल्ले से हो रही है। इसका मूल कारण भी गरीबी है।

इसका खुलासा हाल ही में मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ सक्रिय पुणे के एनजीओ अन्याया रहित जिंदगी (एआरजेड) की रिपोर्ट से हुआ। एआरजेड प्रमुख अणुरेन्द्र पाण्डे ने पुणे से फोन पर पत्रिका को बताया कि वर्ष 2014 से 2019 में गोवा की रेड लाईट एरिया से बंगाल की 353 लड़कियों को बचाया गया है।

इसमें कोलकाता के आर्थिक और शैक्षिक तौर से पिछड़े परिवार की लड़किया भी अधिक हैं। इसका मूल कारण उनके परिवार की आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, कम उम्र में उनकी शादी होना और नौकरी पाने के लिए उनके अयोग्य और अकुशल होना है।

10 गुना मानव तस्करी घटने का दावा

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का हवाला दे कर राज्य सरकार बंगाल में दस गुना लड़कियों की तस्करी में कमी आने का दावा कर रही है। बंगाल में 2016 में लड़कियों की तस्करी के 3579 मामलों हुए थे, जो 2017 में 357 मामलेथे। साथ हङी लापता होने के मामले दो गुनी से अधिक हो कर 53,345 हो गई है।

लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताएं इस परङ संदेह जताया है। उनका कहना है कि मानव तस्करी के बहुत से मामलों को पुलिस गुमशुदा, अपहरण और अन्य अपराधों के तहत मामले दर्ज कर रही है, जो बच्चों की सुरक्षा के तहत आते हैं। लेकिन सरकारी अधिकारी इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहे है, लेकिन वे अपने नाम का खुलासा करने से मना कर रहे हैं।

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Manoj Singh
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