जनता रसोई में राजनीतिक रोटियां सेंकने की बढ़ती होड़

चुनाव से ठीक पहले वादों और लोकलुभावन योजनाओं का पिटारा खोलने में कोई दल पीछे नजर नहीं आ रहा है। पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ ऐसा ही देखा गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मां किचन की शुरुआत की। इसके तहत राज्य सरकार पहले आओ पहले पाओ के आधार पर पांच रुपए में भरपेट खाना खिला रही है

By: Rabindra Rai

Published: 03 Mar 2021, 11:43 PM IST

लोकलुभावन योजनाओं का पिटारा खोलने में कोई पार्टी पीछे नहीं
चुनाव से ठीक पहले कई राज्यों ने अपनाया है यह फॉमूला
रवीन्द्र राय
कोलकाता. चुनाव से ठीक पहले वादों और लोकलुभावन योजनाओं का पिटारा खोलने में कोई दल पीछे नजर नहीं आ रहा है। पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ ऐसा ही देखा गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मां किचन की शुरुआत की। इसके तहत राज्य सरकार पहले आओ पहले पाओ के आधार पर पांच रुपए में भरपेट खाना खिला रही है। यह पहला मौका नहीं है, जब चुनाव से ठीक पहले तृणमूल सरकार ने यह फॉर्मूला अपनाया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक में भी ऐसे फॉर्मूले अपनाए गए हैं। तमिलनाडु में ऐसे मामले सबसे ज्यादा हैं। एक तरह से कहा जाए तो देश में जनता रसोई/कैंटीन में राजनीतिक रोटियां सेंकने की होड़ बढ़ती जा रही है।
जनता को किफायती दर पर कोई चीज उपलब्ध कराने को गलत नहीं ठहराया जा सकता, पर राजनीतिक विश्लेषक और विपक्ष के नेता चुनाव से पहले शुरू इस योजना को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐन चुनाव से ठीक पहले बांटी जाने वाली इस प्रकार की रेवडिय़ां सियासी फायदा नहीं दे पाती हैं। उनका मानना है कि यदि योजना चुनाव से एक-डेढ़ साल पहले शुरू की जाए या कोई ऐसी योजना हो, जिसका फायदा चुनाव से पहले ज्यादातर लोगों तक पहुंच चुका हो, तब यह कारगर हो सकती है।
--
भाजपा ने स्कीम को चुनावी स्टंट कहा
दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा ने इस स्कीम को चुनावी स्टंट बताकर खारिज कर दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि बंगाल के लोगों के पास खाना खरीदने तक के पैसे नहीं हैं, इसलिए उनको मां कैंटीन चलानी पड़ रही है ताकि उन्हें पांच रुपए में खाना मिल सके। तृणमूल सरकार ने साबित कर दिया है कि वो विफल रही हैं। लोग आर्थिक रूप से इतने कमजोर हैं कि उन्हें पांच रुपए में खाना खिलाना पड़ रहा है।
--
जब गांधी ने खोली थी कम्युनिटी किचन
कम्युनिटी किचन के विचार को महात्मा गांधी ने 100 साल पहले आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। जब वह दक्षिण अफ्रीका से लौटकर शांति निकेतन पहुंचे तो उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई के अलावा दूसरे काम भी छात्रों को खुद से करने आना चाहिए। 10 मार्च 1915 को महात्मा गांधी ने कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की सहमति से स्वयं सहायता आंदोलन की शुरुआत की। इसके तहत एक कम्युनिटी किचन भी बनाई गई जहां हर बैच के छात्र खाना बनाते थे।
--
जयललिता को जाता श्रेय
देश में इस तरह की योजना की अगुआई करने का श्रेय तमिलनाडु की दिवगंत मुख्यमंत्री जयललिता को जाता है जिन्होंने 19 फरवरी 2013 में अम्मा किचन की शुरुआत की थी। इस स्कीम के तहत एक रुपए में इडली, पांच रुपए में सांभर- चावल और तीन रुपए में दही-चावल मिलता था। इस योजना में साफ-सफाई और गुणवत्ता वाले भोजन का खास ख्याल रखा गया था।
--
राज्यों में रसोई/कैंटीन
तमिलनाडु : अम्मा कैंटीन
आन्ध्रप्रदेश : एनटीआर, अन्ना कैंटीन
कर्नाटक : इंदिरा कैंटीन
ओडिशा: आधार रसोई
मध्यप्रदेश : दीनदयाल रसोई
दिल्ली : आम आदमी कैंटीन
राजस्थान : इंदिरा रसोई
महाराष्ट्र : शिव भोजन थाली
पंजाब : साडी रसोई
यूपी : प्रभु रसोई
--
इनका कहना है
यह मां किचन है, हमें अपनी मां पर गर्व हैं, जहां भी कोई मां होगी वहां चीजें अच्छी होंगी, हम सब अपनी माओं को सलाम करते हैं। मां किचन में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर पांच रुपए में भरपेट खाना मिलेगा।
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, प. बंगाल

Rabindra Rai Editorial Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned