45 में से 39 किलोमीटर सुरंग वाले इस रेल रूट से घेरेंगे चीन को

- इंजीनियरिंग की नायाब मिसाल बनेगा सेवक-रंगपो रेलमार्ग, ममता बनर्जी के रेलमंत्री कार्यकाल में पास हुई थी योजना
- कुल लंबाई- 44 किलोमीटर- बंगाल में- 41 किलोमीटर, सिक्किम में 3.14 किलोमीटर
- रास्ते में 14 सुरंगे- 13 बड़े व 11 छोटे पुल
- कुल लंबाई का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सुरंग में
- कुल- 5 स्टेशन प्रस्तावित
- योजना की घोषणा- वर्ष 2009
- समाप्त होने का संभावित समय- मार्च- 2023

By: Paritosh Dube

Updated: 21 Jun 2021, 01:36 AM IST

कोलकाता.
भारतीय रेलवे के नक्शे से दूर सिक्किममें छुक-छुक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के सेवक स्टेशन से सिक्किम के रंगपो के बीच निर्माणाधीन रेलवे लाइन इंजीनियरिंग की नायाब मिसाल होगी। कंचनजंघा पर्वतमाला और तीस्ता घाटी को पार करने वाली यह परियोजना महानंदा अभ्यारण्य से भी होकर गुजरेगी। रेल रूट पर सेवक, रियांग, तीस्ता बाजार, मेल्ली व रंगपो स्टेशन तैयार किए जाएंगे। सिक्किम को भारत से जोडऩे वाला राष्ट्रीय राजमार्ग क्र्रमांक दस सर्दियों व बरसात में अक्सर बंद हो जाता है। रेलवे लाइन बिछ जाने से यातायात व्यवस्था सुचारू रहेगी । योजना के अगले चरण में रंगपो और सिक्किम की राजधानी गंगटोक के बीच रेल लाइन तैयार की जाएगी। जिसे आगे नाथुला दर्रे ( पास) तक ले जाने की योजना है। रेल लाइन चीन की घेराबंदी के लिए भारतीय सेना के साजो सामान, रसद की समय पर पहुंच सुनिश्चित करेगी। रेल योजना देश की रक्षा ज़रूरतों के लिए भी जरूरी है।

निर्माण की लागत बढ़ी

वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में अनुमोदित की गई रेल परियोजना की लागत धीमी गति के कारण वर्ष 2020 तक 4085 करोड़ रूपए हो गई । चुनौतीपूर्ण निर्माण में लगी विभिन्न एजेंसियां भूंकप और स्खलन क्षेत्र होने की वजह से अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
उत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शुभानन चंदा कहते हैं कि रेल परियोजना पूरी होने पर सिक्किम रेलवे के नक्शे में आ जाएगा। इलाके में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, यातायात की समस्या का समाधान होगा। मार्च 2023 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Paritosh Dube
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