बेटियों को स्वावलंबी बना रहे आईआरएस मीणा


- अब तक देश के 15 राज्यों में चलाया बेटियों को बचाने का अभियान
- निर्धन व होनहार बेटियों की पढ़ाई में करते हैं मदद

By: Vanita Jharkhandi

Updated: 02 Aug 2020, 08:31 PM IST


कोलकाता. भारतीय राजस्व सेवा के 2004 बैच के अधिकारी हरिनारायण मीणा प्रशासन के साथ सामाजिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रहे हैं। वे अक्सर अपनी छुट्टियों का सदुपयोग सामाजिक कार्यों के लिए करते हैं। कॉलेज में पढ़ाई के समय से ही वे देश में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की घटती संख्या को लेकर चिंतित थे। इसको लेकर भी उन्होंने अभियान चलाया। मीणा अब तक देश के करीब १५ राज्यों में बेटी बचाओ आंदोलन अपने बल पर विभिन्न रूपों में चला चुके हैं।
बेटियों को स्वावलंबी बनाने की मुहिम के तहत वे कभी निर्धन व होनहार बेटियों की पढ़ाई में मदद करते हैंतो कभी बेटियों व माताओं का सम्मान करते हैं। जनवरी 2016 में उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. हेमलता मीणा के आइडिया पर एक नया कार्यक्रम शुरू किया। इसका नाम बेटी बचाने के लिए पहियों पर मुहिम रखा। इस कार्यक्रम को देश भर में अच्छा रेस्पॉन्स मिला। उन्होंने एक लाख से अधिक वाहनों पर अपने खर्चे से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता अभियान चलाया। अब पूरे देश के वाहनों पर ये संदेश दिखने लगे। पढऩे लिखने में असमर्थ होनहार बेटियों को मीणा ने पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद की है। 1975 में जयपुर में जन्मे मीणा अबतक करीब 1500 लड़कियों की मदद कर चुके हैं।
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कोलकाता की सड़कों पर खींचा हाथरिक्शा
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ परफॉर्मेंस मैनेजमेंट ऑफ कस्टम्स जीएसटी की क्षेत्रीय इकाई कोलकाता में अपर निदेशक के पद पर पदस्थापित मीणा ने पिछले साल कोलकाता की सड़क पर हाथरिक्शा खींचकर चालकों की व्यथा को समझा। उन्होंने कई हाथरिक्शा चालकों की मदद भी की थी। बहुमुखी प्रतिभा के धनी मीणा ने तीन पुस्तकें भी लिखी है जिनमें कविता संग्रह "अब जीने भी दो बेटियों को" व "कोविड 19 संकट व विश्व का बदलता परिदृश्य"प्रमुख है।
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ऐसे बदलें देश की तस्वीर
अपने वेतन से पैसे बचाकर मीणा सामाजिक कार्यक्रम चलाते हैं। वे अपने तथा अपने परिवार के लिए कपड़ों की खरीदारी कम से कम करते हैं। फिल्म देखने कभी हॉल नहीं जाते। कोई पार्टी आदि नहीं करते। पैसे बचाकर लोगों की मदद करते हैं। उनका कहना है कि यदि हम सब मिलकर अपने खर्च में कटौती कर बचे पैसे से गरीबों की मदद करेंगे तो देश की तस्वीर कुछ और ही हो सकती है।
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पर्यावरण के प्रति फैला रहे जागरूकता
पर्यावरण से गहरा लगाव रखने वाले मीणा अब तक देश भर में करीब 80 हजार पौधे लगा चुके हैं। बतौर योग इंस्ट्रक्टर वे देश में कई जगह योग प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित कर चुके हैं। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों व कस्टम्स एवं सेंट्रल एक्साइज व जीएसटी अधिकारियों व कर्मचारियों से लेकर आम आदमी के लिए भी 60 से ज्यादा योग प्रशिक्षण कैम्प लगा चुके है।

Vanita Jharkhandi Reporting
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