जेएनयू की घटना भाजपा की ‘फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक’: ममता बनर्जी

  • तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने कहा कि उन्होंने एक छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की थी, लेकिन शैक्षणिक संस्थान पर कभी ऐसा ‘शर्मनाक हमला’...

By: Ashutosh Kumar Singh

Published: 06 Jan 2020, 07:28 PM IST

कोलकाता

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में शिक्षकों और छात्रों पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए घटना को भाजपा की ‘फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक’ बताया। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने कहा कि उन्होंने एक छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की थी, लेकिन शैक्षणिक संस्थान पर कभी ऐसा ‘शर्मनाक हमला’ नहीं देखा। भाजपा ने ममता बनर्जी की इस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया और कहा कि ममता को ‘घडिय़ाली आंसू’ बहाना बंद करना चाहिए।
गंगासागर के दौरे पर जाने से पहले बनर्जी ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि देशभर में जो हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। एक समय वह भी छात्र राजनीति का हिस्सा थी, लेकिन छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों पर कभी ऐसा हमला नहीं देखा था। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला था। भाजपा के खिलाफ आवाज उठाने वाले को ‘राष्ट्र विरोधी’ या ‘पाकिस्तानी’ करार दे दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले को देश का दुश्मन बता दिया जाता है। ऐसे कैसे किसी को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर राष्ट्र विरोधी या पाकिस्तानी होने का तमगा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस अरविंद केजरीवाल सरकार के नहीं, बल्कि केन्द्र सरकार के अधीन है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा ने गुंडे भेजे और दूसरी ओर पुलिस से कहा कि वह कोई कार्रवाई नहीं करे। ऐसे में पुलिस कर भी क्या सकती है? जब उच्चपदस्थ लोग उनसे कुछ न करने के लिए कहें। मुख्यमंत्री ने रविवार को भी जेएनयू परिसर में हुए हमले की निंदा की थी और उसे ‘घृणित कृत्य’ बताया था। तृणमूल का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शिक्षकों और छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सोमवार को जेएनयू पहुंचा।

पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने ममता की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता को जेएनयू के छात्रों के लिए घडिय़ाली आंसू बहाना बंद करना चाहिए। पिछले वर्ष 19 सितंबर को जब यादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो के साथ धक्का-मुक्की हुई थी तब वे कहां थी? सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए वे प्रतिनिधिमंडल को भेज रही हैं। उन्होंने उन कॉलेजों में प्रतिनिधिमंडल क्यों नहीं भेजे, जहां बीते आठ साल में तृणमूल के कार्यकर्ता लूट-खसोट कर रहे थे।
दूसरी ओर जादवपुर और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालयों के छात्रों ने रविवार को नयी दिल्ली में जेएनयू परिसर में हुए हमले के विरोध में सोमवार को अलग-अलग रैलियां निकालीं। आइसा और एसएफआई ने विश्वविद्यालय परिसर के पास स्थित 8बी बस स्टैंड तक प्रदर्शन मार्च निकाला और केन्द्र की भाजपा सरकार तथा आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के खिलाफ नारेबाजी की।

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