हिंसा मामले में सुनवाई से अलग हुईं न्यायमूर्ति इंदिरा

  • कहा-मुझे इस मामले की सुनवाई में हो रही है कठिनाई

By: Ram Naresh Gautam

Published: 19 Jun 2021, 06:14 PM IST

कोलकाता/नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दो मई को चुनाव संबंधी हिंसा में मारे गए भाजपा के दो कार्यकर्ताओं के परिजनों की याचिका पर सुनवाई से खुद को शुक्रवार को अलग कर दिया।

इस याचिका में अदालत की निगरानी में जांच कराने और मामलों को केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।

मामले की सुनवाई शुरू होते ही न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने कहा कि मुझे इस मामले की सुनवाई में कुछ कठिनाई हो रही है। इस मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

न्यायमूर्ति एम आर शाह की अवकाशकालीन पीठ ने आदेश दिया कि मामले को किसी अन्य उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसमें न्यायमूर्ति बनर्जी हिस्सा नहीं हैं।

उच्चतम न्यायालय ने 18 मई को याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और विश्वजीत सरकार और स्वर्णलता अधिकारी की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार तथा केंद्र से जवाब मांगा था।

विश्वजीत सरकार के बड़े भाई और स्वर्णलता के पति चुनावी हिंसा में मारे गए थे। उन्होंने दलील थी कि यह एक बहुत ही गंभीर मामला है और राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना के दिन हुई दो भाजपा कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या में राज्य सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा था कि इस मामले में सीबीआई या एसआईटी द्वारा अदालत की निगरानी में जांच किए जाने की जरूरत है क्योंकि राज्य पुलिस शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

क्या है घटना
अधिवक्ता सरद कुमार सिंघानिया द्वारा दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि अभिजीत सरकार की दो मई को तृणमूल कांग्रेस समर्थकों की कथित भीड़ ने हत्या कर दी थी।

एक अन्य याचिकाकर्ता स्वर्णलता अधिकारी, हरन अधिकारी की पत्नी है। हरन सोनारपुर दक्षिण विधानसभा में बूथ नंबर 199 ए में बूथ कार्यकर्ता थे। 80 वर्षीय पिता की मौजूदगी में हरन अधिकारी को बेरहमी से मार दिया गया।

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