बंगाल में 31 जुलाई तक लॉकडाउन बढ़ा

सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय
-मेट्रो और लोकल ट्रेन सेवा फिलहाल नहीं होगी शुरू

By: Krishna Das Parth

Updated: 24 Jun 2020, 11:00 PM IST

कोलकाता . पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में जारी लॉकडाउन को 31 जुलाई तक बढ़ाने की घोषणा बुधवार को सर्वदलीय बैठक के बाद की। राज्य में फिलहाल जारी लॉकडाउन 30 जून को समाप्त होने वाला था। लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण में हो रहे इजाफे से पश्चिम बंगाल सरकार काफी चिंतित है। ऐसे में राज्य भर में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के अलावा सरकार के पास अन्य कोई विकल्प नहीं है।
राज्य सचिवालय में बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में राज्य की वर्तमान परिस्थितियों खासकर महामारी के बढ़ते संक्रमण के मुद्दे पर चर्चा के बाद लॉकडाउन बढ़ाए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में 31 जुलाई तक राज्य में लॉकडाउन रहने पर सहमति व्यक्त की गई है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में ढील देते हुए 30 जून तक लॉकडाउन रहने की घोषणा की थी। राज्य के समस्त सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों, धार्मिक स्थलों, शॉपिंग मॉल और रेस्तरां खोलने की अनुमति भी दी गई है। यही नहीं, सड़क परिवहन को सचल रखने के लिए बस सेवा, टैक्सी और जलपथ परिसेवा भी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य में फिलहाल लोकल ट्रेन सेवा और मेट्रो रेल सेवा बंद रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि बैठक में उपस्थित कुछ नेताओं ने परिवहन व्यवस्था को लेकर हो रही समस्याओं को उठाया। सरकार उनकी शिकायतों को दूर करने का भरसक प्रयास करेगी। लॉकडाउन को लेकर अलग-अलग नेताओं के अलग-अलग विचार सामने आए। कोई लॉकडाउन को और कठोरता के साथ लागू करने का प्रस्ताव दिया तो कोई मार्च महीने में 4 दिन विलंब से लॉकडाउन जारी करने पर भी सवाल उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सब की बात सुनी और फिर 31 जुलाई तक लॉकडाउन बढ़ाने का निर्णय लिया। राज्य में समस्त शिक्षण संस्थानों खासकर स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालय 31 जुलाई तक बंद रहेंगे, परंतु उच्च माध्यमिक की बाकी परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत ही ली जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले जिन-जिन क्षेत्रों में छूट दी गई है। उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यदि बदलाव की जरूरत पड़ती है तो राज्य प्रशासन इसे समय रहते सूचित करेगा।
अम्फान मुकाबले पर सर्वदलीय कमेटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत महीने आया चक्रवाती तूफान के बाद की परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार ने एक सर्वदलीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री डॉ. पार्थ चट्टोपाध्याय, वाम मोर्चा नेता डॉक्टर सुजन चक्रवर्ती, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष, कांग्रेस सांसद प्रोफेसर प्रदीप भट्टाचार्य, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता स्वपन बंदोपाध्याय सहित अन्य नेता कमेटी में शामिल किए गए हैं। उक्त कमेटी सरकार के समक्ष प्रस्ताव पेश करेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। तूफान से सुंदरवन में हुई तबाही को लेकर नीति आयोग को एक पत्र भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुंदरवन इलाके में अस्थाई बांध निर्माण के अलावा इलाके की समस्याओं का स्थाई समाधान हो, इस विषय को लेकर एक मास्टर प्लान तैयार करने पर भी सहमति व्यक्त की गई। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के हित में सभी लोग एक सुर में आवाज उठाएं, इसे देखना होगा। महामारी और ना फैले इसके लिए हम सभी को सतर्कता बरतनी होगी। तूफान से क्षतिग्रस्त परिवार मुआवजा से यदि वंचित हैं तो उन्हें शीघ्र आवेदन करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राहत को लेकर राजनीति करने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। उनके पास राहत को लेकर भेदभाव से संबंधित करीब 2100 शिकायतें पहुंची हैं जिसकी गंभीरता से जांच की जा रही है।
डीएम और बीडीओ को किया सतर्क
तूफान राहत वितरण को लेकर शिकायतों के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों और प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीयो) को सतर्क करते हुए एक सप्ताह की मोहलत दी है। उन्होंने कहा कि राहत को लेकर हुई अनियमितता के दोषी कौन लोग हैं, इसकी सूची तैयार करने को कहा गया है। ममता ने कहा कि अन्याय करने का अधिकार मुझे भी पार्टी और प्रशासन ने नहीं दी है। कोई यदि खुद को क्षमतावान समझ कर अपने लोगों को लाभ पहुंचा रहा है, यह कतई स्वीकार नहीं है।

Krishna Das Parth Desk
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