अफसरशाही में फंसा रहा माझेरहाट ब्रिज मामला

अफसरशाही में फंसा रहा माझेरहाट  ब्रिज मामला

Prabhat Kumar Gupta | Publish: Sep, 06 2018 07:37:19 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जुलाई महीने में मुख्य सचिव का ध्यान आकर्षित करते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के नाम नोटिस जारी किया था।

 

- ममता के पत्र से सामने आई सच्चाई, 15 दिनों में मांगी थी रिपोर्ट
- माझेरहाट ब्रिज हादसे में चौंकाने वाला खुलासा

कोलकाता.
माझेरहाट ब्रिज हादसे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जुलाई महीने में मुख्य सचिव का ध्यान आकर्षित करते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के नाम नोटिस जारी किया था। उन्होंने राज्य के सभी, ब्रिजों, फ्लाईओवर और विभिन्न जलाशयों की वस्तुस्थिति पर जांच कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा था। गत 5 जुलाई को जारी निर्देश के अनुसार 15 दिनों के भीतर सीएम के समक्ष रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। पत्र के जवाब में पीडब्लूडी के प्रधान सचिव अर्णव राय ने सभी क्षेत्र के प्रमुख इंजीनियरों को उनके अधीन आने वाले ब्रिजों और पुलों की जांच का जिम्मा सौंपा था। उन्हें 16 जुलाई तक सीएम के समक्ष जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इस पर पहल नहीं की और इसी बीच माझेरहाट ब्रिज ढह गया। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में मुख्य सचिव से, मुख्य सचिव ने पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। प्रधान सचिव ने विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ से रिपोर्ट देने को कहा।

जर्जर: पता था पीडब्ल्यूडी को-

लोक निर्माण विभाग को पता था कि माझेरहाट ब्रिज जर्जर है। गत मार्च में ही विभाग के बेहला सब डिवीजनल कार्यालय ने इसकी मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित किया था। 31 मार्च को टेंडर जमा करने का अंतिम दिन था। तीन बार टेंडर आमंत्रित करने के बाद भी किसी संस्था ने हिस्सा नहीं लिया। अंत में देखा यह गया कि केवल एक ही संस्था इसमें भाग ले रही है। इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे-

पिछले कुछ समय से ब्रिजों के लगातार ढहने जैसे हादसे हो रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग मारे भी जा चुके हैं। वृहत्तर बड़ाबाजार में ही 31 मार्च 2016 को गिरीश पार्क के निकट विवेकानन्द फ्लाईओवर का एक हिस्सा ढह गया था। हादसे में 2६ लोग मारे गए थे और 80 से अधिक घायल हुए थे। 2.2 किमी लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था, जिसे 2010 तक पूरा हो जाना चाहिए था। निर्माण संस्था ने बार-बार समयसीमा को आगे बढ़ाया। इस फ्लाईओवर के निर्माण का ठेका हैदराबाद की आईवीआरसीएल नामक कम्पनी को दिया गया था। कुछ राज्य ने इस कंपनी पर पाबंदी लगा दी है।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned