ममता की नजर हिंदू वोटों तथा हिन्दी भाषियों पर

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हिंदू वोटों तथा हिन्दी भाषियों को साधने की कोशिश में सोमवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने राज्य के 8 हजार से अधिक गरीब सनातन ब्राह्मण पुजारियों को 1 हजार रुपए मासिक भत्ता और मुफ्त आवास देने की घोषणा की। साथ ही ममता ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में हिंदी प्रकोष्ठ की संरचना को औपचारिक रूप दिया

By: Rabindra Rai

Published: 14 Sep 2020, 10:43 PM IST

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हिंदू वोटों तथा हिन्दी भाषियों को साधने की कोशिश में सोमवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने राज्य के 8 हजार से अधिक गरीब सनातन ब्राह्मण पुजारियों को 1 हजार रुपए मासिक भत्ता और मुफ्त आवास देने की घोषणा की। साथ ही ममता ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में हिंदी प्रकोष्ठ की संरचना को औपचारिक रूप दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हिन्दी सेल का चेयरमैन बनाया।
माना जा रहा है कि अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोपों का जवाब देने तथा हिन्दी भाषियों को पाले में करने के लिए ममता बनर्जी ने इस योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पहले सनातन ब्राह्मण सम्प्रदाय को कोलाघाट में एक अकादमी स्थापित करने के लिए भूमि प्रदान की थी। इस सम्प्रदाय के कई पुजारी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। हमने उन्हें प्रतिमाह 1 हजार रुपए का भत्ता प्रदान करने और राज्य सरकार की आवासीय योजना के तहत मुफ्त आवास प्रदान करके उनकी मदद करने का फैसला किया है।
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हिंदी की शिक्षा को सशक्त किया: सीएम
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के लोगों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हिंदी भाषियों के हित में काम करने और हिंदी की शिक्षा को सशक्त करने के लिए कई काम किए हैं। उनकी सरकार सभी भाषाओं का सम्मान करती है और उसमें भाषायी आधार पर पूर्वाग्रह नहीं है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि हमने एक नई हिंदी अकादमी स्थापित करने का निर्णय किया है। हमने एक दलित साहित्य अकादमी भी स्थापित करने का निर्णय किया है। दलितों की भाषा का बंगाली भाषा पर प्रभाव है।
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हिंदी भाषी वोटरों की बड़ी संख्या
पार्टी सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी हिंदी भाषियों के वोट बैंक को फिर से अपना बनाना चाहती हैं। 2019 के चुनाव में हिंदी भाषी लोगों ने बड़े पैमाने पर भाजपा का साथ दिया था, जिससे कि उसे यहां की कई सीटों पर जीत भी मिली थी। राज्य के तमाम महत्वपूर्ण जिलों में हिंदी भाषी वोटरों की एक बड़ी संख्या है, जो कि यहां चुनाव परिणामों में एक निर्णायक भूमिका भी निभाते रहे हैं। इन जिलों में उत्तर 24 परगना, सिलीगुड़ी, आसनसोल, दुर्गापुर समेत अन्य जिले हैं।
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विभाजनकारी ताकतों को देंगे शिकस्त: त्रिवेदी
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य दिनेश त्रिवेदी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आज (सोमवार) हिंदी दिवस है और इस दिन प्रकोष्ठ की संरचना को औपचारिक रूप देने का फैसला किया गया है, जो 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद से अनौपचारिक तरीके से काम कर रहा था। त्रिवेदी ने कहा कि प्रकोष्ठ जमीनी स्तर पर हिंदी को मजबूत करेगा। ममता बनर्जी सरकार राज्य को फूलों के एक गुलदस्ते के रूप में देखती है। प्रदेश में हर भाषा को बोलने वाले के लिए सभी दरवाजे खुले हैं। तृणमूल कांग्रेस की हिंदी सेल इस राज्य में लोगों को एकजुट करेगी, जिससे कि यहां पर विभाजनकारी ताकतों को हराया जा सके।
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ये सब चुनावी फायदे के लिए: भाजपा
हिंदी सेल के बनने पर भाजपा ने इसे एक सियासी स्टंट बताया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि जो लोग पहले ये कह रहे थे कि हम बाहरी लोगों को बंगाल पर राज नहीं करने देंगे वह अब हिंदी का महत्व समझ रहे हैं लेकिन, ये सब सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है और तृणमूल कांग्रेस इसके लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

Rabindra Rai Editorial Incharge
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