भाजपा का विकल्प बन सकता है ममता का फेडरल फ्रंट

  • तृणमूल प्रमुख के नेतृत्व में क्षेत्रीय दल दे रहे गोलबंद होने के संकेत

By: Ram Naresh Gautam

Published: 15 May 2021, 09:06 PM IST

मनोज कुमार सिंह

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पूरे देश में यूं ही सुर्खियों में नहीं रहा। चुनाव नतीजे ने 2024 में भाजपा के विकल्प में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फेडरल फ्रंट के अस्तित्व में आने की हलचल पैदा कर दी है।

मोदी विरोधी सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के नेतृत्व में भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दल गोलबंद होने के संकेत दे रहे हैं।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर के गठबंधन की जरूरत है। कोरोना के बादल छंटते ही ममता बनर्जी ने भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ बैठक का प्रस्ताव रखा है।

ममता बनर्जी के प्रचंड बहुमत मिलने और केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (डीएमके) की जीत ने फेडरल फ्रंट के आकार लेने की जगी संभावनाओं को और प्रबल बना दिया है।

2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव भी होने वाला है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि क्षेत्रीय नेता के रूप में ममता ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जगह बना दी है और आने वाले दिनों में कोरोना संकट से मुकाबले में प्रधानमंत्री मोदी की विफलता बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।

कांग्रेस के सिमटने से रास्ता आसान- पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के सिमटने और उसकी जगह भाजपा के मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने के कारण फेडरल फ्रंट के गठन का रास्ता आसान हो गया है।

अब ओडिशा के नवीन पटनायक और तेलंगाना के के. चंद्रशेखर राव के लिए फ्रंट में शामिल होने की राजनीतिक अनिवार्यता बन जाएगी।

जानकार यहां तक कहते हैं कि बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चा के नामो-निशान मिट जाने के कारण कांग्रेस इस फ्रंट में शामिल हो सकती है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करने में कोई परहेज नहीं होगा।

तब नेतृत्व को लेकर बिखर गया था फ्रंट
पिछले लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ फेडरल फ्रंट गठन की पहल की थी। तेलंगाना के नेता के. चंद्रशेखर राव, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबु नायडू और डीएम प्रमुख एमके स्टालिन ने दिलचस्पी दिखाई लेकिन कांग्रेस को शामिल नहीं करने और नेतृत्व को लेकर फ्रंट बिखर गया।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इस बार देश और देश के राजनीतिक हालात अलग हैं। ममता बनर्जी का मोदी विरोधी होने, अधिक अनुभवी और विभिन्न क्षेत्रीय दलों से संपर्क होने के कारण उन्हें नेतृत्व का मौका मिल सकता है।

Ram Naresh Gautam
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