बंगाल की जूट मिलों को केंद्र से बड़ी राहत, जानिए...

केंद्र सरकार ने जूट उद्योग के लिए बड़ा फैसला किया है। जूट किसानों और श्रमिकों के हितों में बना जूट पैकेजिंग मैटेरियल्स एक्ट, 1987 के तहत सरकार ने खाद्यान्नों में 100 फीसदी और चीनी की पैकेजिंग में 20 फीसदी जूट के बोरे का इस्तेमाल को कायम रखा है।

By: Prabhat Kumar Gupta

Published: 24 Jun 2020, 10:24 PM IST


नई दिल्ली/कोलकाता.
केंद्र सरकार ने जूट उद्योग के लिए बड़ा फैसला किया है। जूट किसानों और श्रमिकों के हितों में बना जूट पैकेजिंग मैटेरियल्स एक्ट, 1987 के तहत सरकार ने खाद्यान्नों में 100 फीसदी और चीनी की पैकेजिंग में 20 फीसदी जूट के बोरे का इस्तेमाल को कायम रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में अनिवार्य जूट पैकेजिंग की समय सीमा 30 जून से बढ़ाकर 30 सितम्बर करने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद सरकार की ओर से इस बारे में निर्देश जारी कर दिया है।

2.5 लाख श्रमिकों और करीब 40 लाख किसानों को फायदा:

सरकार के इस फैसले से जूट उद्योग में काम करने वाले करीब 2.5 लाख श्रमिकों और करीब 40 लाख किसानों को फायदा होने का दावा किया जा रहा है। फैसले से पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में जूट उत्पादक किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी। सरकार का दावा है कि रबी सीजन में खाद्यान्नों की खरीदारी जारी है। सरकार जो अनाज खरीद रही है उसे जूट के बोरे में पैकेजिंग की जरूरत होगी। यही नहीं जूट उद्योग के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार के फैसले से ना केवल कच्चे जूट की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि जूट क्षेत्र का विविधीकरण (डायवर्सिफिकेशन) भी होगा। उल्लेखनीय है कि पैकेजिंग की समयसीमा 30 जून को समाप्त हो रहा है।

इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (ईज्मा) ने सरकार के फैसले को सामान्य करार दिया है। संगठन के चेयरमैन राघव गुप्ता ने पत्रिका को बताया कि अनिवार्य जूट पैकेजिंग से संबंधित समयसीमा को 30 सितम्बर तक बढ़ाने का सरकार का निर्णय आम है पर स्वागतयोग्य है।

दोहरी नीतिः

नेशनल जूट बोर्ड के पूर्व सदस्य तथा राज्यसभा सांसद सुखेन्दू शेखर राय ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र अनिवार्य जूट पैकेजिंग की समयसीमा बढ़ा रहा है वहीं दूसरी ओर, अनाजों की पैकिंग में जूट के बोरे के बदले प्लास्टिक के बोरे का धड़ल्ले से इस्तेमाल की अनुमति तथा बांग्लादेश से जूट के आयात भी करने की छूट दे रहा है। जूट उद्योग के संदर्भ में केंद्र का रूख और अनिवार्य पैकेजिंग की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय परस्पर विरोधी है। सरकार का इस तरह के निर्णय महज दिखावा के अलावा कुछ भी नहीं है।

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