‘स्वाभिमानी बनाना सबसे बड़ा महादान’

‘स्वाभिमानी बनाना सबसे बड़ा महादान’

Shishir Sharan Rahi | Publish: Sep, 08 2018 10:56:37 PM (IST) Kolkata, West Bengal, India

पर्युषण पर्व पर मुनि कमलेश की धर्मसभा

कोलकाता. किसी को दान देने के बजाय सहयोग करस्वावलंबी जीवन जीने के लायक बनाकर उसके आत्म सम्मान की रक्षा करते हुए स्वाभिमानी बनाने का प्रयास करना सबसे बड़ा महान दान है। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने पर्युषण पर्व के तीसरे दिन महावीर सदन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुनि ने कहा कि जिसका तन स्वच्छ है वह गरीब नहीं हो सकता। उसे परिश्रम करना सिखाना चाहिए। नकद दान देकर उसे निकम्मा-आलसी बनाने का पाप न कमाएं, क्योंकि ऐसा करना बेरोजगारी को और बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आज देश में फर्जी भिक्षावृत्ति की बाढ़ आ गई है। पूरी दुनिया में हिंदुस्तान की छवि खराब हो रही है, इसलिए सरकार को अंकुश लगाना चाहिए। विदेशी सैलानी भारत में आते हैं और तीर्थस्थल और पर्यटन स्थल पर भिक्षा मांगने वालों की ओर से मेहमानों के साथ जो छीना-झपटी होती है उससे भारत की छवि खराब होती है और हमें शर्मसार होना पड़ता है। मुनि ने कहा कि धन के दान से सद्विचारों का दान उत्तम है। उससे उसके आत्मा का उत्थान होगा भव भव का कल्याण होगा। दान कभी व्यर्थ नहीं जाता और आत्मा की बैंक में पुण्य के रूप में जमा होता है। जैन संत ने कहा कि किसी एक जीव को बचाकर अभयदान देना तीन लोग की संपत्ति से बड़ा दान है। मुनि ने कहा कि जिस को जिस वस्तु की जिस समय आवश्यकता होती है उसके अभाव में अगले का जीवन संकट में है, अन्नदान, वस्त्र दान, नेत्रदान, देहदान, विद्यादान के कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पैसा दान दिए बिना भी पुण्य कमाया जा सकता है। मुनि कमलेश का प्रवचन सभा में 9 सितंबर को केशलोंच समारोह कार्यक्रम आयोजित होगा। साथ ही भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। तपस्वी घनश्याम मुनि का 32वां उपवास शनिवार को रहा। कौशल मुनि ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। अशोक काकरिया, वीर प्रकाश जैन, महावीर भंडारी, मांगीलाल जैन, रामेश्वर कटारिया ने कार सेवा का लाभ लिया।

 

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