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देवताओं की वाणी है संगीत

संगीत मेरे रग-रग में है। संगीत मुझे विरासत में मिला। संगीत साधना है। नाम और दाम कमाने का साधन नहीं है। यह कहना है शास्त्रीय संगीत गायक सुरेश कुमार डागा है। वे कहते हैं कि प्रभु के पास जाने तथा तार से तार मिलाने का जरिया है संगीत। देवताओं की वाणी है संगीत।

कोलकाता

Updated: November 18, 2021 12:33:28 am

बोले, शास्त्रीय संगीत गायक सुरेश कुमार डागा
रवीन्द्र राय
कोलकाता. संगीत मेरे रग-रग में है। संगीत मुझे विरासत में मिला। संगीत साधना है। नाम और दाम कमाने का साधन नहीं है। यह कहना है शास्त्रीय संगीत गायक सुरेश कुमार डागा है। वे कहते हैं कि प्रभु के पास जाने तथा तार से तार मिलाने का जरिया है संगीत। देवताओं की वाणी है संगीत। एक बिजनेसमैन होने के बावजूद डागा का संगीत से नाता गहरा है। राजस्थान के बीकानेर के मूल निवासी डागा का संगीत के क्षेत्र में सफर 1970 से लेकर अब तक जारी है।
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बनारस घराने से संगीत की शिक्षा
डागा ने मुम्बई के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा तथा कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही संगीत के प्रति उनकी रुचि थी। फिर वे बनारस घराने के मोहनलाल मिश्रा की शरण में चले गए। उनकी देखरेख में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा हासिल की।
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गुणी लोगों के लिए सरगम संस्था
डागा ने कुछ मित्रों के साथ मिलकर 1974 में सरगम नामक संस्था की स्थापना है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज और परिवारों के गुणी लोगों को मंच प्रदान करना था। यह प्रक्रिया लगातार 25 साल तक जारी रही। आज भी यह प्रयास जारी है पर अब सार्वजनिक रूप से प्रस्तुति नहीं हो रही है। संस्था के 47 साल पूरे होने पर उत्सव इस साल 26 सितम्बर को डागा धर्मशाला में मनाया गया।
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पेशेवर रवैया नही अपनाया
डागा ने बताया कि उन्होंने पेशेवर के तौर पर नहीं बल्कि शौक से भजन, ठुमरी तथा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी है। फिल्म गीतों में खासकर ओ दुनिया के रखवाले को मंच पर पेश किया। 1982 में सरगम भजनानंजलि एचएमवी स्टूडियो में रिकॉर्ड की गई। सरगम के होनहार कलाकारों ने भजन गाए, जिनके शब्द भी लिखे और सुर भी दिया।
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लोगों का स्नेह ही अवार्ड
डागा ने बताया कि ठुमरी का अध्ययन किया। ठाकुर की साधना और पूजा की। यही उनके लिए सबसे बड़ा अवार्ड है। समाज के लोगों से अपार स्नेह मिला। मेरा जीवन ही संगीत है। संगीत से ही मेरा जीवन है।
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स्वर और ज्ञान सीखना जरूरी
डागा ने नए कलाकारों को सीख देते हुए कहा कि जो भी गाएं, संभल कर गाएं। चाहे जितना भी साधारण गीत हो, स्वर से गाएं। स्वर का ज्ञान और गाने का हुनर सीखना जरूरी है। राग आधारित गाने ही टिकाऊ होते हैं।
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