West Bengal Assembly Election 2021: विकास और औद्योगिकीकरण की उम्मीद में मतदान कर रह उपेक्षित पुरुलिया के लोग

दशकों से बड़े-बड़े चनावी वादों पर भरोसा कर विकास की रोशनी ढ़ूढ़ रहे उपेक्षित पुरुलिया जिले में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के चुनावी वादों की गूंज शान्त होने के बाद शनिवार सुबह से मतदान चल रहा है। जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों के लोग फिर से गरीबी और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन से मुक्ति, इलाके में औद्योगिकीकरण और विकास की रोशनी आने की उम्मीद में सुबह से मतदान कर रहे हैं।

By: Manoj Singh

Published: 27 Mar 2021, 01:11 PM IST

मतदान करने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में मतदान केन्द्र पहुंच रहे हैं मतदाता
कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 (West Bengal Assembly election 2021) के पहले चरण का का मतदान शनिवार सुबह सात बजे से जारी है। एक के बाद एक दशकों से बड़े-बड़े चनावी वादों पर भरोसा कर विकास की रोशनी ढ़ूढ़ रहे उपेक्षित पुरुलिया जिले में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के चुनावी वादों की गूंज शान्त होने के बाद शनिवार सुबह से मतदान चल रहा है। जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों के लोग फिर से गरीबी और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन से मुक्ति, इलाके में औद्योगिकीकरण और विकास की रोशनी आने की उम्मीद में सुबह से मतदान कर रहे हैं। जिले के नौ विधानसभा में से मात्र मानबाजार विधानसभा क्षेत्र में कुछ उद्योग-घंधे हैं। इस दिन सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग मतदान करने के लिए मतदान केन्द्र पहुंच रहे हैं।
एक के बाद एक दशकों तक बड़े-बड़े चुनावी वादों पर भरोसा कर विकास की रोशनी ढ़ूढ़ रहे उपेक्षित पुरुलिया में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के चुनावी वादों की गूंज गूंज रही हैं। राजनीतिक दलों के शोर के बीच गरीबी में जीने की अपनी नियती मान कर जीने वाले इस जिले के आम लोग फिर से गरीबी और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन से मुक्ति के लिए इलाके में औद्योगिकीकरण और विकास की रोशनी जलाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कभी माओवादी आंतक के साए में रहने वाले पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में 62000 करोड़ की लागत से औद्योगिक पार्क बनाने का वादा किया है। लेकिन भाजपा इसे तृणमूल का झूठा वादा करार दे रही है और क्षेत्र के प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी, बच्चों को निःशुल्क पढ़ाई, चिकित्सा और शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के लिए 10000 करोड़ की परियोजना लगा शुद्ध पानी पहुंचाने का वादा कर रही है। पुरुलिया जिले में तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम मोर्चा विकास के मुद्दे् पर लोगों से वोट मांग रहे हैं। पुरुलिया विधानसभा के रहने वाले अनुमप मांझी कहते है कि जिला के लोगों का बेहतर भविष्य जिले में औद्योगिकीकरण में ही है। वादे सभी करते हैं, लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं करता।
वाम मोर्चा की बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार ने अपने अंतिम दिनों में पुरुलिया में औद्योगिकीकरण की कोशिश की थी। एक ईस्पात कारखाना लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण भी की गई, लेकिन माओवादियों के प्रभाव ने उस पर पानी फेर दिया और जमीन वापस करना पड़ा।

वर्ष 2019 के लोकभा चुनाव में लोगों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इस जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से आठ पर भाजपा और एक पर तृणमूल कांग्रेस बढ़त बनाई हुई थी। भाजपा इस विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा चुनाव की स्थिति को बनाए रखने की कोशिश में लगी हे। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस 2016 के विधानसभा चुनाव वाली अपनी स्थिति प्राप्त करने की कोशिश में लगी है। तब तृणमूल सात सीट जीती थी और दो सीट पुरुलिया व बांघमुंडी से कांग्रेस जीती थी।
भाजपा के जिला अध्यक्ष विद्यासागर चक्रवर्ती कहते हैं कि पुरुलिया का विकास नहीं होना भाजपा के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। जनहित का काम करने के बजाए इलाके के तृणमूल कांग्रेस के नेता अपना भविष्य बनाने के व्यस्त रहे हैं।
सिंचाई के लिए पानी के अभाव के कारण कृषि का पैदावार कम होता है और उद्योग-धंधे नहीं होने के कारण लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।
तृणमूल कांग्रस के पुरुलिया जिला अध्यक्ष गुरुपद्द टुडु दावा करते हैं कि ममता बनर्जी की सरकार ने जिले के लोगों को रोजगार दिलाने के लिए औद्योगिक पार्क सहित अन्य कई परियोजनाएं शुरू करने की पहल की हैं।
राजनीतिक रंग बदले, स्थिति नहीं बदली
1977 से 2006 तक वामपंथियों के लाल दुर्ग रहे पुरुलिया जिला के गरीब माओवादियों के प्रभाव में आ गए। बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन की बयार बहने के साथ वर्ष 2010 के बाद पुरुलिया के बीहड़ इलाकों और जंगलों में माओवादियों के प्रभाव घटने लगा। लोग अति उग्र वामपंथी दलों को छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए। लोगों ने माकपा के लाल रंग त्याग कर 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल के रंग में रंग गए, जो 2016 तक बर्करार रहा। फिर भी क्षेत्र की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। विकास की उम्मीद में लोकसभा चुनाव 2019 में पुरुलिया ने एक बार फिर करवट बदला और अपने लाल बंजर मिट्टी में कमल खिलाया। जिल के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से आठ में बढ़त हासिल कर भाजपा ने पुरुलिया लोकसभा जीत लिया, जिसमें पुरुलिया सहित पांच आदिवासी बहुल विधानसभा भी शामिल है।
पहले चरण में जिले के इन क्षेत्रों में मतदान
पहले चरण के तहत पुरुलिया जिले के बांदवान, बलरामपुर, बाघमुंडी, जयपुर, मानबाजार, काशिपुर, पारा और रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 27 मार्च को मतदान होगा।
पिछड़ी जाति बहुल क्षेत्र
वर्ष 2011 के जनगणना के अनुसार पुरुलिया में 19.38 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 18.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी थी। एक अनुमान के अनुसार अब दोनों की आबादी लगभग 50 प्रतिशत के आस-पास है।
लोगों की मांग
रोजगार, सिंचाई के लिए पानी, शिक्षा की सुविधा, पीने का शुद्ध पानी, विकास और औद्योगीकीकरण

Manoj Singh Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned