कोलकाता एयरपोर्ट में लगी नई प्रणाली, कोहरे में हो पाई सुरक्षित लैंडिंग

देर रात को 12 बजे के बाद से शुरू हुई प्रणाली को पहले दिन ही घने कोहरे का सामना करना पड़ा

By: Vanita Jharkhandi

Published: 04 Jan 2018, 07:13 PM IST

 

कोलकाता. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घने कोहरे के बीच नए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम कैट थ्री बी ने कामकाज शुरू कर दिया। बुधवार की देर रात को 12 बजे के बाद से शुरू हुई प्रणाली को पहले दिन ही घने कोहरे का सामना करना पड़ा।

नई प्रणाली ने भलीभांति कार्य किया। कोहरे में भी कोलकाता एयरपोर्ट में उड़ान सेवा सामान्य रही। वहीं घने कोहरे के कारण कई हवाईअड्डों पर लैंडिंग नहीं हो पाई। एेसे कई विमानों की लैंडिंग कोलकाता में हुई।
एयरपोर्ट निदेशक अतुल दीक्षित ने बताया कि एयरपोर्ट में बुधवार की रात से कैट थ्री बी इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम चालू हो गया है। नई प्रणाली के लागू होने से कोहरा होने पर भी विमान सेवा बाधित नहीं होगी।

क्या है कैट-थ्री बी उपकरण

विमानों की लैंडिंग के वक्त घना कोहरा होने से दृश्यमानता( विजिबिलिटी) कम होने पर पायलट को रनवे नजर नहीं आता है। जिस कारण लैंडिंग नहीं हो पाती है। इस स्थिति में विमान को दिशा बदलनी पड़ती है। मौसम में सुधार होने पर वापस विमान को आना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों ही खर्च होता है।
- कैट टू उपकरण में 350 मीटर की विजिबिलिटी तक विमान उतर सकता है। इससे कम विजिबिलिटी होने पर विमान को उतार पाने में कैट टू उपकरण मदद नहीं करता। वहीं कैट थ्री बी 50 मीटर तक की विजिबिलिटी में भी विमान को सुरक्षित उतार सकता है।

- कैट टू में सिर्फ रनवे तक ही विमान उतर सकता है। कैट थ्री बी में विमान लैंड करने के साथ ही टैक्सी वे तक सुरक्षित जा सकता है।
- कैट टू में सेंट्रालाइन लाइट का फासला 30 मीटर तक रहता है जो कोहरे के समय लैंडिंग को प्रभावित करता है। वहीं कैट थ्री बी में यह फासला 7.5 मीटर तक रहता है। जिसके कारण लैंडिंग आसानी से हो जाता है।

- कैट टू की तुलना में कैट थ्री अत्याधुनिक होने के कारण इसका ट्रांसमीटर पावरफुल है। जिसके कारण पायलट विमानों को आसानी व सुरक्षित लैंड करा सकेंगे।

Vanita Jharkhandi Reporting
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