‘समय-काल कब बदले, कोई नहीं जानता’

पूर्वांचल कल्याण आश्रम की रामकथा

By: Shishir Sharan Rahi

Published: 24 May 2018, 10:19 PM IST

कोलकाता. जीवन में शुभता लानी है, तो उसके लिए समय की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। समय और काल का कब परिवर्तन हो यह कोई नहीं जानता, क्योंकि एक ही रात में राम के राज्याभिषेक का आयोजन वनगमन में परिवर्तित हो गया। सनातन हिन्दू धर्म और संस्कृति की व्याख्याकार रामकथा वाचिका विजया उर्मलिया ने गुरुवार को साल्टलेक में रामकथा के दौरान प्रवचन में यह उद्गार व्यक्त की। पूर्वांचल कल्याण आश्रम कोलकाता/हावड़ा की ओर से आयोजित रामकथा के 6ठे दिन वनगमन और केवट प्रसंग पर उर्मलिया ने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी समभाव रखना राम के चरित्र की विशेषता है। राम ने अपनी माता कैकेयी के प्रति किसी तरह का विद्वेष जीवन भर नहीं रखा। उन्होंने कहा कि सीता ने अवध में रहना स्वीकार नहीं कर वन के कंटककीर्ण जीवन को सहज स्वीकार कर लिया। उर्मलिया ने कहा कि परिवारों में स्वार्थ की भावना से बिखराव होता है और नम्रता के पथ से मानव उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। मुख्य यजमान ऊषाकिरण गुप्ता, दैनिक यजमान गोमती देवी दारूका, श्रृंगार यजमान गुंजन-विनय गुप्ता, प्रसाद यजमान अशोक खेमका ने व्यासपीठ की पूजा की। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम अध्यक्ष जगदेवराव ऊरांव, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष कृपाप्रसाद, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य गुणवंतसिंह कोठारी आदि मौजूद थे। काकुडग़ाछी समिति की महिला कार्यकर्ताओं ने देशभक्ति गीत-पूर्ण विजय संकल्प हमारा प्रस्तुत किया।

---मकसद सुंदरवन में निर्माणाधीन कन्या छात्रावास एवं कल्याण आश्रम का सेवाकार्य
दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरवन स्थित गोसाबा द्वीप में निर्माणाधीन कन्या छात्रावास एवं कल्याण आश्रम के सेवाकार्य के लिए पुरुषोत्तम मास के अवसर पर पूर्वांचल कल्याण आश्रम कोलकाता/हावड़ा की ओर से 19 से 27 मई तक साल्टलेक के द स्टेडल होटल में रामकथा का उद्घाटन उद्योगपति अशोक तोदी ने किया था। मकसद सुंदरवन में निर्माणाधीन कन्या छात्रावास एवं कल्याण आश्रम का सेवाकार्य है। पूर्वांचल कल्याण आश्रम 65 वर्षों से आदिवासियों के कल्याण में लिप्त है। आदिवासियों को समाज के रूप धारा से जोडऩे की जरूरत है। मुख्य यजमान को छोडक़र रोजाना यजमान नए होंगे। २७ मई तक रोजाना दोपहर 2 से शाम ६ बजे तक रामकथा जारी रहेगी। इस दौरान 129 पंडित रोजाना पाठ करेंगे। कथा के अंतिम दिन 27 मई को राम राज्याभिषेक, हवन और कथाविश्राम का आयोजन होगा।
---कौन हैं उर्मलिया?
सनातन हिन्दू धर्म-संस्कृति की कुशल व्याख्याकार के साथ-साथ वर्तमान में वनवासी विकास समिति पेंड्रा (छत्तीसगढ़) की जिला संरक्षिका विजया उर्मलिया का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेण्ड्रा नगर में हुआ था। कथा से प्राप्त राशि को निर्धनों की सेवा में समर्पित करने वाली विजया के पिता कृष्णदत्त उर्मलिया भी कथावाचक हैं। विजया ने बाल्यकाल से ही पिता के साथ कथावाचन कार्यक्रमों में भाग लेते हुए सबसे पहले छत्तीसगढ़ के कोरबा में महज ९ साल की आयु में भागवत कथा सप्ताह अनुष्ठान में भाग लिया। असम में 33 दिनों में 426 किलोमीटर की पदयात्रा कर सनातन हिन्दू संस्कृति की लौ प्रज्जवलित करने सहित थाईलैंड में भी कथा वाचन कर चुकी है।

Shishir Sharan Rahi Reporting
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