अब चुनावी खेला सिमटेगा बंगाल में: मुकेश केजरीवाल की ग्राउंड रिपोर्ट

बाकी चार राज्यों में आज समाप्त हो रहा मतदान।

पश्चिम बंगाल में अभी पूरे 5 चरण बाकी, और गर्माएगा माहौल

By: Mukesh Kejariwal

Published: 06 Apr 2021, 10:32 AM IST

कोलकाता। मंगलवार के मतदान के साथ जहां बाकी चार राज्यों में चुनावी सरगर्मी शांत हो जाएंगी, पश्चिम बंगाल में यह असली क्लाइमेक्स की ओर बढ़ रही होगी। राज्य में मंगलवार को 31 सीटों पर हो रहे तीसरे चरण के मतदान के बाद भी पांच चरण बाकी होंगे। भाजपा जहां अपने सारे दिग्गज नेताओं, स्टार प्रचारकों और दूसरे राज्यों के कार्यकर्ताओं को अब यहां झोंकेगी, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मुकाबले के लिए कुछ नए तीर जुटा रही हैं।

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योगी और शुभेंदु का रणनीतिक इस्तेमाल
पार्टी के प्रचार की कमान संभाल रहे नेताओं के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी अभी दस रैलियां और करेंगे। राज्य में अब तक वे 9 रैलियां कर चुके हैं। ये बताते हैं कि आगे के चरणों में पीएम और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तृणमूल से आए शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का रणनीतिक इस्तेमाल होगा। इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनवाल और अधिक से अधिक महिला चेहरों को भी पार्टी उतारेगी। ममता के बाहरी और निजेर या अपने के मुद्दे में नहीं फंसते हुए ये सभी तुष्टिकरण का आलाप ही लगाएंगे।

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ममता और जया
बंगाली मूल की सपा सांसद जया (भादुड़ी) बच्चन ममता की मदद के लिए पहुंच चुकी हैं और अगले कई दिनों तक वे अलग-अलग जगहों पर तृणमूल के लिए रोड शो करेंगी। ममता बनर्जी ने भाजपा की सेना के मुकाबले के लिए दूसरे विपक्षी दलों से सहयोग मांगा है। लेकिन भाजपा पर बाहरी होने का आरोप लगा रही ममता प्रचार में सिर्फ बंगाली मूल के लोगों को ही सामने रखना चाहती हैं।

सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक तैनाती

तीसरे चरण में दक्षिण चौबीस परगना सहित विभिन्न इलाकों में हिंसा की आशंका को देखते हुए सिर्फ तीन जिलों की 31 सीटों के लिए केंद्रीय बलों की लगभग 1000 कंपनियां उपलब्ध करवाई गई हैं।

ममता की कुर्सी के पहिए
एक पैर से ही बंगाल चुनाव जीत लेने का दावा कर रही ममता की सत्ता का पहिया इसी इलाके में है। इस चरण की 31 सीटों में से 29 अभी तृणमूल के पास ही हैं। उससे पिछले चुनाव में भी ममता ने 26 सीटों पर जीत दर्ज कर अपना डंका बजाया था। इस चरण में दक्षिण 24 परगना जिले की 16, हुगली जिले की 8 और हावड़ा की 7 सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर 205 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

फसल काटने की तैयारी में भाजपा
तृणमूल और भाजपा दोनों ही के लिए सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण 24 परगना है। इस जिले में कुल 31 सीटें हैं, जिनमें से 15 सीटों पर अन्य चरण में चुनाव हो रहे हैं। जिले की कुल सीटों में से भी 29 पिछले चुनाव में तृणमूल ने ही जीती थीं। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा उत्तर 24 परगना में तो जगह बनाने में कामयाब हुई लेकिन इस जिले में उसे कामयाबी नहीं मिली। लंबे समय से इस इलाके में मेहनत कर रहे पार्टी नेताओं को लगता है कि अब फसल काटने का सही समय आ गया है।

मुस्लिम वोट पर गठबंधन की नजर
इस चरण में शामिल सीटों में मुस्लिम आबादी काफी है। लोकसभा चुनाव में भी इन्होंने अधिकांशतः तृणमूल को ही वोट किया। लेकिन वाम-कांग्रेस और सिद्दीकी गठबंधन खास तौर पर हावड़ा में सबसे अधिक उम्मीद लगाए है। मुस्लिम बहुल इलाके में ही भाजपा को भी ज्यादा उम्मीद है। उसे लगता है मुस्लिम ध्रुवीकरण होने का सीधा लाभ उसे मिल सकेगा।

हुगली में दलित वोटों पर दाव
हुगली जिले में दलितों की संख्या को देखते हुए दलों की नजर इन पर है। लोकसभा में भाजपा हुगली में भी अपनी जीत दर्ज कर चुकी है। हुगली की तारकेश्वर सीट से ही भाजपा के उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता भी राज्य सभा से इस्तीफा दे कर मैदान में उतरे हैं। यहां की आरामबाग सीट पर तृममूल ने भाजपा सांसद सौमित्र खान की पत्नी सुजाता मंडल खान को उतार कर मुकाबला दिलचस्प कर दिया है।

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